मामला हाईकोर्ट पहुंचा, टेंडर निरस्त करने में जुटा नगर निगम
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। होर्डिंग के ऑनलाइन टेंडर की प्रक्रिया में अधिकारियों की लापरवाही से निगम को करीब 2.10 करोड़ रुपये का चूना लग चुका है। ऑनलाइन टेंडर में मनमानी और एक विवादित कंपनी को ठेका देने की तैयारी के आरोपों के साथ हाईकोर्ट में मामला पहुंच गया है।
नगर निगम की पहली बोर्ड बैठक में होर्डिंग माफियाराज खत्म करने का एलान हुआ। निगम अधिकारियों ने पारदर्शिता की बात करते हुए शहर में होर्डिंग के ठेके की प्रक्रिया पहली बार ऑनलाइन टेंडर से पूरा करने की बात कहीं। निगम ने दो करोड़ से बढ़ाकर छह करोड़ रुपये करके ऑनलाइन टेंडर की प्रक्रिया पूरी कर दी। 28 जुलाई 2023 को चार श्रेणी में टेंडर खुला, जिसमें हीरा और प्रधान इंफ्रा कंपनी को शहर में होर्डिंग लगाने की ठेका मिला। कंपनियों से होर्डिंग लगाने की लिस्ट मांगी गई। जिस पर निगम ने आपत्ति लगाते हुए अपने मुताबिक जगह चिह्नित करने की बात कही। कंपनी से पैसा जमा करने के लिए निगम ने नोटिस भेजा और पैसा जमा नहीं करने पर कंपनी को ब्लैकलिस्ट करने की चेतावनी दी गई है।
2022 में नगर निगम को होर्डिंग से दो करोड़ रुपये की आय हुई थी। अबकी बार टेंडर करीब छह करोड़ रुपये होने का अंदेशा था। अब नए सत्र में अधिकारियों द्वारा ऑनलाइन टेंडर में अनियमितता करने का आरोप लगाकर एक कंपनी हाईकोर्ट चली गई। आरोप लगाया है कि नगर निगम के अधिकारी होर्डिंग का ठेका विवादित कंपनी को देने के लिए मनमानी कर रहे हैं। इसकी निष्पक्ष जांच होने के साथ-साथ अधिकारियों से जवाब तलब किया जाएं।
निगम और कंपनी की खींचतान में विभाग का नुकसान हो रहा। छह महीने से शहर लोग मुफ्त में अवैध तरीके से होर्डिंग लगा रहे है। दावा है कि अगर होर्डिंग का ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया सही ढंग से हो जाता तो अब तक निगम की तिजोरी में 2.10 करोड़ रुपये आ जाते।
मनमानी तरीके से लग रहे होर्डिंग
निगम के अधिकारियों का कहना है कि शहर में मनमानी तरीके से कुछ लोगों ने होर्डिंग लगा रखे है, जिन्हें हटवाने के लिए निगम का प्रवर्तन दल काम करता है। दिल्ली रोड पर राजनीतिक लोगों ने त्योहार के उपलक्ष्य में होर्डिंग लगाएं हुए हैं, जिनसे पैसा नहीं लिया जाता। प्रर्वतन दल रोजाना कई जगहों से अवैध होर्डिंग हटाता है।
वर्जन
जिन लोगों ने टेंडर में भाग लिया था, उन्होंने शर्त के अनुसार पैसा जमा नहीं किया। तीन बार नोटिस देकर चेतावनी दी जा चुकी है। टेंडर निरस्त किया जाएगा और री-टेंडर होगा। एक कंपनी द्वारा हाईकोर्ट में शिकायत की गई है। निगम की ओर से कोर्ट में साक्ष्य प्रस्तुत किए जाएंगे। - प्रमोद कुमार, अपर नगर आयुक्त