पिछले दिनों जिस तरह से राज्यमंत्री दिनेश खटीक ने विभागीय अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे, उसके बाद उनको मुख्यमंत्री द्वारा उनको गृह मंडल में जिम्मा दिया जाना काफी अहम माना जा रहा है। प्रभारी मंत्री होने का मतलब है मुख्यमंत्री के नजदीक रहना। इससे पहले सुरेश खन्ना, दिनेश खटीक और दानिश आजाद अंसारी के पास मेरठ और उससे पहले लखनऊ मंडल की जिम्मेदारी थी।
मेेरठ मंडल की जिम्मेदारी औद्योगिक विकास मंत्री नंदगोपाल गुप्ता नंदी, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र कश्यप और राज्यमंत्री बृजेश सिंह को सौंपी गई है। गंगा एक्सप्रेस-वे का कार्य औद्योगिक विकास मंत्री नंदगोपाल गुप्ता देख रहे हैं, ऐसे में मेरठ के लिहाज से ये भी महत्वपूर्ण है।
सहारनपुर मंडल का प्रभार महिला कल्याण मंत्री बेबीरानी मौर्य, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार नितिन अग्रवाल और राज्यमंत्री विजय लक्ष्मी गौतम को सौंपा गया है। वहीं, मेरठ से राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर को झांसी मंडल में मत्स्य मंत्री डॉ. संजय निषाद, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार जेपीएस राठौर के साथ प्रभार सौंपा गया है। सीएम योगी, उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक अब 6-6 मंडलों (25-25 जिलों ) की निगरानी करेंगे।