बिजनौर। अब तक गांव-देहात तक सीमित गुलदार शहर की सीमा तक पहुंच गया है। बिजनौर शहर से मात्र तीन किमी की दूरी पर एक निर्माणाधीन कॉलोनी में लगाए पिंजरे में एक गुलदार फंस गया। जहां यह गुलदार था, उसके आसपास कई स्कूल-कॉलेज भी हैं। ऐसे में शहर के लोगों की धड़कने भी बढ़ने लगीं हैं।
बिजनौर-नूरपुर रोड पर तीन किमी दूर एक निर्माणाधीन कॉलोनी में पिछले कई दिनों से गुलदार देखा जा रहा था। सीसीटीवी में गुलदार होने की पुष्टि भी हुई। वहां आसपास स्कूल प्रबंधन और प्रधानाचार्य ने प्रशासन और वन विभाग को पत्र लिखा। वन विभाग ने वहां चार दिन पहले पिंजरा भी लगा दिया। सोमवार की सुबह करीब पांच बजे पिंजरे में गुलदार फंस गया। वन विभाग ने गुलदार को वहां से नर्सरी पहुंचाया।
डीएफओ ज्ञान सिंह ने बताया कि सात सितंबर को भी एक गुलदार पकड़ा गया था। दोनों गुलदार को फिलहाल पिंजरों में रखा गया है। शासन से इन्हें छुड़वाने की अनुमति मांगी गई है। वहां से निर्देश आने के बाद इन्हें रिजर्व फॉरेस्ट में भेजा जाएगा।
- नूरपुर रोड पर स्कूलों में भी बढ़ा खतरा
वन विभाग ने जिस जगह गुलदार पकड़ा है, उस रोड पर दो बड़े डिग्री कॉलेज तो हैं ही, साथ ही तीन इंटर कॉलेज भी हैं। उस काॅलोनी में एक मादा गुलदार देखी जा रही थी, उसके साथ तीन शावक भी थे। ऐसे में वहां और भी गुलदार होने की आशंका जताई जा रही है।
- डेढ़ साल में 100 गुलदार मिले
वन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले में गुलदार की संख्या डरावनी होने लगी है। मात्र डेढ़ साल में 65 गुलदार वन विभाग के पिंजरों में फंस चुके हैं। इनमें 09 गुलदार पिछले 18 दिन में ही पकड़े गए हैं। इनके अलावा 35 गुलदार या तो दुर्घटना में मारे या आपसी संघर्ष में मारे गए। ऐसे में गन्ने के खेतों में इनकी संख्या 500 से ज्यादा होने की संभावना है।
शहरी आबादी के लिए एडवाइजरी जारी
- रात में चलते समय झाड़ियों के पास गाड़ी न रोकें
- बाइक सवार खेत के किनारे से न गुजरे, बल्कि बीच में गाड़ी चलाएं
- गुलदार होने की सूचना पर उसे देखने न जाएं, इससे हमले बढ़ सकते हैं
- बाहरी कॉलोनी में पर्याप्त लाइट की व्यवस्था रखें
- दरबाजे खुले न छोड़ें, रात में खाली सड़क पर टहलने न निकलें