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जमीयत की सद्भावना संसद: धर्मगुरुओं ने दिया नफरत मिटाने का संदेश, जगद्गुरु विजेंद्र बोले- मुसलमान भारत की संतान

Sun, 28 Aug 2022 08:54 PM IST
प्रशांत कुमार अमर उजाला नेटवर्क, देवबंद।

सार

जमीयत सद्भावाना मंच के संयोजक मौलाना जावेद सिद्दीकी कासमी ने बताया कि आंध्र प्रदेश में 13, महाराष्ट्र में 21, उत्तर प्रदेश में एक, असम में 25, बिहार में पांच, मध्य प्रदेश में आठ, केरल में चार, तमिलनाडु में एक, हरियाणा एवं पंजाब में 27, मेघालय में तीन, मणिपुर में एक, त्रिपुरा में दो, झारखंड में एक, गोवा में एक, पश्चिम बंगाल में आठ, गुजरात में एक, दिल्ली में दो और कर्नाटक में एक सद्भावना संसद आयोजित की गई।
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Jamiat sadbhavna sansad - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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धार्मिक घृणा और सांप्रदायिकता को देश की धरती से मिटाने और भारतीयता एवं मानवता की भावना की जीत के लिए रविवार को जमीयत उलमा-ए-हिंद की विभिन्न इकाइयों की ओर से देश के सौ से अधिक शहरों में सद्भावना संसद का आयोजन किया गया। जिसमें अनेक मठ और मंदिरों से जुड़े हिंदू धर्मगुरुओं ने भी भाग लिया। 

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जमीयत उलमा-ए-हिंद के पूर्व प्रस्तावित कार्यक्रम के तहत देश के लगभग सभी बड़े शहरों दिल्ली, चेन्नई, पुणे, नागपुर, औरंगाबाद, बेंगलुरु, निजामाबाद, आदिलाबाद, लखनऊ, भोपाल, खरगौन, रांची, दरंग करीमगंज (असम), बिशनपुर मणिपुर, गोवा, भितबारी मेघालय, मेवात, यमुनानगर, किशनगंज, मोहाली आदि में सद्भावना संसद आयोजित की गईं। इनमें सभी धर्मों के गुरुओं ने भाग लिया और संयुक्त रूप से राष्ट्रीय एकता और शांति का संदेश दिया। इस दौरान अलग-अलग शहरों में हुई सभा स्थलों पर मानवता का राज होगा, पूरा भारत साथ होगा, नफरत मिटाओ, देश बचाओ और तीर से न तलवार से देश चलेगा प्यार से जैसे नारों के पोस्टर और बैनर लगाए गए थे। 

सभी शहरों के लिए दिल्ली से जारी अपने विशेष संदेश में जमीयत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि भारत हमारी मातृभूमि है, इसके कण-कण से हमें स्वाभाविक प्रेम है। इस देश की सबसे बड़ी विशेषता अनेकता में एकता है। यहां सदियों से विभिन्न सभ्यताओं और धर्मों के लोग मिलजुल कर रहते आए हैं। मौलाना मदनी ने कहा कि अंग्रेज जैसी दमनकारी सरकार भी हमारी इस विशेष पहचान को पूरी तरह से खत्म करने में विफल रही है। कहा कि इन दिनों कुछ शक्तियां इस देश की पहचान को मिटाना चाहती हैं, लेकिन उनकी ताकत कितनी भी बड़ी हो, वह भारत की महान शक्ति और इसकी सदियों की परंपरा को पराजित नहीं कर सकतीं। मौलाना मदनी ने कहा कि इस मिट्टी की ताकत का आभास कराने के लिए ही हमने ऐसी संसदों का आयोजन किया है। 

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Jamiat sadbhavna sansad - फोटो : अमर उजाला
मुसलमान भी इसी भारत की संतानः जगद्गुरु
चेन्नई के न्यू कॉलेज कैंपस में आयोजित सद्भावना संसद में कांचीपुरम मठ के शंकराचार्य के प्रतिनिधि विश्वानंद ने जगद्गुरु विजेंद्र सरस्वती की ओर से भेजे गए संदेश में कहा कि भारत में सभी धर्मों के लोग हाथ की पांच उंगलियों की तरह हैं और वह इसी प्रकार रहेंगे। उन्होंने कहा कि एकता, संकल्प और प्रार्थना, तीन ऐसे मंत्र हैं जो इस महान धरती और इसकी संतानों के लिए होते हैं, और निःसंदेह मुसलमान भी इसी भारत की संतान हैं। जमीयत उलमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना हकीमुद्दीन कासमी ने कहा कि यह कार्यक्रम किसी जमीयत या दल का नहीं बल्कि देश से प्यार करने वाले लोगों की एक संयुक्त सभा है। उन्होंने जमीयत की संयुक्त राष्ट्रवाद की विचारधारा को आधार बताया और कहा कि भारत से मुसलमानों का संबंध सबसे पुराना है।
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ये मुख्य धर्मगुरु सद्भावना संसदों में रहे शामिल
चेन्नई में सिख गुरु हरप्रथ सिंह, ईसाई पादरी सांतोम चर्च यसरी सरगोनम, रांची में होफमैन के निदेशक महेंद्र प्रताप सिंह, बेंगलुरु में दलित नेता भास्कर प्रसाद, दलित ईसाई नेता मनोहर चंद्र प्रसाद बंगलूरु, सुरजीत सिंह इंफाल, भंते सरपीत साहिब अमरावती, श्रीश्री स्वामी दुजेंद्रानंद रामकृष्ण मिशन आश्रम मालदा, दयाराम नामदेव जी भोपाल, फादर स्टीफन मरिया, प्रोफेसर मनोज जैन, फादर बोल मैक्स पेरिया गोवा, महंत मधुगिरी, गुरु वासु देवगिरी मुक्तेश्वर मंदिर समेत पांच सौ हिंदू धर्म गुरुओं ने अलग-अलग संसदों में हिस्सा लिया और विचार रखे। 
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