इसी श्रृंखला में प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका चंदनामती माता ने आए हुए सभी विद्वानों को कहा कि वे देश के विभिन्न अंचलों में धर्म के प्रचार-प्रसार में अग्रणी भूमिका निभाएं, जिससे समाज में सदाचार एवं धार्मिक वातावरण बना रहे। पीठाधीश स्वस्तिश्री रवीन्द्रकीर्ति स्वामी ने आए हुए सभी विद्वानों का सम्मान अंग वस्त्र एवं पूजन के वस्त्र देकर किया। महिलाओं को सम्मानस्वरूप साड़िया भेंट की गई। पूज्य गणिनी प्रमुख ज्ञानमती माता ने सभी विद्वानों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। संस्थान के महामंत्री अनिल कुमार जैन ने सभी के लिए अपनी शुभकामना प्रेषित की।
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साढे आठ साल में मौन तोड़कर कर ज्ञानमती माता के समक्ष प्रस्तुत किया वक्तव्य
अधिवेशन के अंतिम दिन डाॅ. देवोत ने साढ़े आठ वर्ष बाद अपना मौन तोड़कर ज्ञानमती माता के सान्निध्य में अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया और अपनी मंत्र साधना और पुस्तक लेखन के विषय में प्रकाश डाला। इस अवसर पर उनके परिवार के सैकड़ों लोग मौजूद रहे।
विद्वानों ने अपने-अपने आलेखों का किया वाचन
सायंकालीन सत्र शेष सभी विद्वानों ने अपने-अपने आलेखों का वाचन किया एवं लखनऊ से आई सुनयना जैन, अध्यक्ष अवध प्रान्तीय गणिनी ज्ञानमती भक्त मण्डल लखनऊ ने अपना वक्तव्य प्रस्तुत किया। तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत् महासंघ के अध्यक्ष ने अपना अध्यक्षीय उद्बोधन इस अवसर पर सभी को प्रदान किया एवं महामंत्री विजय कुमार जैन ने इस अवसर पर सभी का संस्थान परिवार की ओर से धन्यवाद किया किया एवं विधिवत् संगोष्ठी के समापन की घोषणा की।