मेरठ। स्पेशल प्रोटेक्शन ग्रुप (एसपीजी) के निदेशक बने आईपीएस आलोक शर्मा पर मेरठ जोन की दो साल 23 दिन की कमान रही। उन्होंने मई 2014 में तीरगिरान हिंसा में मेरठ शहर को जलने से बचाया था। इसके अलावा मुजफ्फरनगर दंगे के बाद सांप्रदायिक सौहार्द बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। मेरठ से सहारनपुर तक जिम्मेदार लोगों से समन्वय बनाकर अपराधियों पर शिकंजा कसने में वह माहिर रहे।
यूपी कैडर 1991 बैच के आईपीएस आलोक शर्मा को एक जनवरी 2014 को मेरठ जोन की कमान सौंपी गई थी। वह 24 जनवरी 2016 तक मेरठ जोन में रहे हैं। उस समय प्रदेश में मुजफ्फरनगर दंगे की आग धधक रही थी। खासतौर पर मेरठ, सहारनपुर, शामली, हापुड़ सहित वेस्ट यूपी के जिलों में सांप्रदायिक तनाव के हालात बने थे। आलोक शर्मा ने पुलिस चार्ट बनाकर गांव-गांव में चौपाल लगवाई थी। इससे सांप्रदायिक सौहार्द बनाने में काफी मदद मिली।
उनके समय में ही 10 मई 2014 में मेरठ के तीरगिरान मोहल्ले में हिंसा हो गई थी। इसमें व्यापारी सुशील रस्तोगी के इकलौते बेटे शुभम रस्तोगी की हत्या की गई। इसे लेकर दो समुदाय के बीच टकराव हो गया था। ऐसे में शहर आग के मुहाने पर खड़ा था। उपद्रवी बेकसूर लोगों पर गोलियां चल रहे थे। हिंसा के बीच आलोक शर्मा ने पहुंचकर एक उपद्रवी को मौके से पकड़ लिया था। इसके बाद उपद्रवियों पर मजबूत कानूनी शिकंजा कसा गया। दोनों समुदाय के जिम्मेदार लोगों में सौहार्द बनाने के लिए कई बार बैठकें भी की गईं। सहारनपुर में आतंक मचा रहा कुख्यात राहुल खट्टा का एनकाउंटर भी आलोक शर्मा के कार्यकाल में हुआ। वह एक ईंट भट्ठा मालिक से वसूली करके लौट रहा था। इसके अलावा भी वेस्ट यूपी के कई कुख्यातों पर कानूनी शिकंजा कसने का काम उन्होंने किया है।
आलोक शर्मा का परिचय
आलोक शर्मा उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के निवासी हैं। वह 1991 में भारतीय पुलिस सेवा में शामिल हुए। वह मुजफ्फरनगर सहित कई जिलों में एसएसपी भी रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश में कई महत्वपूर्ण पदों पर अपनी सेवाएं दी हैं। साल 2021 में एसपीजी में अतिरिक्त महानिदेशक के तौर पर अपनी नियुक्ति से पहले उन्होंने एसपीजी में आईजी की भूमिका निभाई।