मेरठ। ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेंद्र को जिंदा जलाने के विवादित बयान के मामले में सोमवार को सिविल लाइन पुलिस ने सपा नेता व एससी-एसटी आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष मुकेश सिद्धार्थ को एसीजेएम कोर्ट-5 में पेश किया। कोर्ट ने मुकेश सिद्धार्थ की जमानत अर्जी खारिज कर न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। इसके तुरंत बाद आरोपी के अधिवक्ता ने अंतरिम जमानत प्रार्थना पत्र न्यायालय जिला जज मेरठ के यहां दाखिल कर दिया। अपर जिला जज कोर्ट संख्या-एक ने सुनवाई करते हुए मुकेश को 16 जनवरी 2024 तक अंतरिम जमानत दे दी।
परिजनों ने कोर्ट से रिहाई का परवाना जारी करा लिया और जेल की ओर रवाना हो गए। इसका पता चलते ही पुलिस डीजीसी क्रिमिनल सर्वेश शर्मा के माध्यम से न्यायालय को अवगत कराया कि आरोपी ने तथ्य छिपाते हुए अंतरिम जमानत के लिए अर्जी दाखिल की है, उसे जेल भेजा चुका है। इस पर न्यायालय ने गलत तथ्य प्रस्तुत किए जाने पर जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया। पुलिस ने इसकी सूचना जेल प्रशासन को फोन पर दी। मुकेश सिद्धार्थ के परिजन उनकी रिहाई का परवाना लेकर जेल पहुंचे तो अधिकारियों ने बताया कि इसे कोर्ट ने निरस्त कर दिया है। इस पर परिजनों ने हंगामा कर दिया। जेल अधिकारियों ने किसी तरह समझा-बुझाकर उन्हें शांत किया।
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राष्ट्रीय जाटव महासंघ ने मुकदमा खत्म करने की मांग
राष्ट्रीय जाटव महासंघ के पदाधिकारियों ने एसएसपी कार्यालय पहुंचकर मुकेश सिद्धार्थ के खिलाफ दर्ज मुकदमा खत्म किए जाने की मांग की। उन्होंने कहा कि नगर निगम पार्षदों के साथ मारपीट करने वाले भाजपा के मंत्री व एमएलसी के खिलाफ पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। मुकेश सिद्धार्थ के खिलाफ एक बयान के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। इससे जाटव समाज में रोष है। पुलिस भाजपा के मंत्री व एमएलसी के खिलाफ भी कार्रवाई करे या मुकेश सिद्धार्थ के खिलाफ दर्ज कर मुकदमा खत्म किया जाए। जिलाध्यक्ष डॉ. संजीव चिरौड़ी, नेमपाल गौतम, बृजलाल सिंह, डॉ. अशोक मौजूद रहे।
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