दीक्षार्थियों पर परिवार-समाज एवं देश के भरण-संरक्षण का दायित्व
डॉ. जेके बजाज ने कहा कि अपने और परिवार-समाज एवं देश के भरण-संरक्षण का दायित्व बड़ा दायित्व है। पर मैं मानता हूं कि आज जो छात्र-छात्राएं दीक्षा संपन्न कर इस दायित्व की ओर अग्रसर हो रहे हैं वे बहुत सौभाग्यशाली है। उन पर यह दायित्व ऐसे समय पर आया है, जब देश अपने अमृतकाल में प्रवेश कर रहा है। महात्मा गांधी ने जून 1947 में कहा था कि यह मत मानिये के स्वतंत्रता आने पर देश तुरंत समृद्ध समर्थ हो जायेगा।
दीर्घ परतंत्रता के काल में आई विकृतियों को दूर करने के लिये, देश की समाजनीति एवं राजनीति को विशुद्ध करने में, सुशासन स्थापित करने एवं जनता का उत्थान करने में 75 वर्ष तो लगेंगे। अब वे 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं।
राष्ट्र पुनः जागृत होता दिख रहा है। सब ओर एक नयी ऊर्जा दिख रही है। नये विस्तृत राजमार्ग बन रहे हैं। नयी स्वच्छ द्रुतगति वाली रेलगाडियों चलने लगी हैं। नयी राजधानी बन रही है। नगरों को स्वच्छ एवं स्मार्ट बनाया जा रहा है। नये-नये प्रकार के उद्योग एवं उद्यम स्थापित हो रहे हैं। कृषि सुदृढ़ हो रही है, कृषि उत्पादन बढ़ रहा है। देश को सब प्रकार से स्वच्छ बनाने के प्रयास हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लोगों में एक नयी ऊर्जा है। लोग अपने-अपने धर्म के प्रति सजग-सन्निष्ठ हो रहे है। सब में एक नया आत्मविश्वास, नया साहस, नयी उद्यमशीलता एवं नयी प्रतीति दिख रही है।