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MEERUT: CCSU में बोले डॉ. जेके बजाज- दीक्षार्थियों पर परिवार-समाज-देश के भरण-संरक्षण का दायित्व

Thu, 15 Dec 2022 12:50 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ

सार

सीसीएसयू के दीक्षांत समारोह में दौरान राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने छात्र-छात्राओं को मेडल दिए। मुख्य अतिथि आईसीएसएसआर नई दिल्ली के अध्यक्ष पदमश्री डॉ. एके बजाज ने दीक्षार्थियों को संबोधित किया।
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दीक्षांत समारोह में बोलते डॉ. एके बजाज - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मेरठ के चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के 34वें दीक्षांत समारोह में मेडल पाकर छात्र-छात्राओं के चेहरे खिले हुए हैं। पहली बार कुलाधिपति आनंदी बेन पटेल ने सभी टॉपर्स को अपने हाथ से मेडल पहनाए हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि आईसीएसएसआर नई दिल्ली के अध्यक्ष पदमश्री डॉ. एके बजाज ने समारोह में कहा कि भारतीय परंपरा में और भारतीय सभ्यता के मूलभूत साहित्य में दीक्षांत को बहुत महत्त्व दिया गया है। यह वह संधिवेला है जब आप जीवन की एक अवस्था को पूर्ण कर दूसरी में प्रवेश करते हैं। ब्रह्मचर्याश्रम से गृहस्थाश्रम की ओर बढ़ते हैं। अब तक आप विद्यार्थी थे। अपने भरण एवं संरक्षण के लिये परिवार-समाज एवं राष्ट्र पर निर्भर थे। दीक्षांत के पश्चात् आप स्वयं जीविकोपार्जन करेंगे, अर्थोपार्जन करेंगे न केवल अपने अपितु परिवार समाज एवं राष्ट्र के भरण-पोषण में भी समर्थ बनेगे। अब तक आप अन्यों पर निर्भर थे। अब अन्य आप पर निर्भर होंगे।

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डॉ. जेके बजाज ने समझाया गृहस्थाश्रम का महत्व
डॉ. जेके बजाज ने कहा कि जीवन की इस अवस्था का जिसमें अब आप प्रवेश करने वाले हैं, गृहस्थाश्रम का, समाज व जीवन में बहुत ऊंचा स्थान है। महाभारत के शांतिपर्व में जब धर्मपुत्र युधिष्ठर अपने बंधु-बांधवों से लड़ने से बचने के लिए रिक्ति की उन्मुख होने लगते हैं तो उनके चारों भाई, अर्जुन, सहदेव, नकुल और नीम बारी-बारी से उन्हें गृहस्थाश्रम का महत्व समझाते हैं।

अंत में द्रौपदी स्वयं अपनी ओर से और  मां कुंती के आशीर्वचनों का उल्लेख कर उन्हें बताती है कि समाज के समर्थ घटक बनकर अर्थोपार्जन करते हुए अन्य सब का भरण-पोषण एवं संरक्षण करना ही उनके लिये धर्म-सम्मत मार्ग है। इस महान् उत्तरदायित्व से बचकर संन्यास की बात करना तो कायरता ही है। गृहस्थाश्रम की ऐसी महिमा है।

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दीक्षार्थियों पर परिवार-समाज एवं देश के भरण-संरक्षण का दायित्व
डॉ. जेके बजाज ने कहा कि अपने और परिवार-समाज एवं देश के भरण-संरक्षण का दायित्व बड़ा दायित्व है। पर मैं मानता हूं कि आज जो छात्र-छात्राएं दीक्षा संपन्न कर इस दायित्व की ओर अग्रसर हो रहे हैं वे बहुत सौभाग्यशाली है। उन पर यह दायित्व ऐसे समय पर आया है, जब देश अपने अमृतकाल में प्रवेश कर रहा है। महात्मा गांधी ने जून 1947 में कहा था कि यह मत मानिये के स्वतंत्रता आने पर देश तुरंत समृद्ध समर्थ हो जायेगा।

दीर्घ परतंत्रता के काल में आई विकृतियों को दूर करने के लिये, देश की समाजनीति एवं राजनीति को विशुद्ध करने में, सुशासन स्थापित करने एवं जनता का उत्थान करने में 75 वर्ष तो लगेंगे। अब वे 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं।

राष्ट्र पुनः जागृत होता दिख रहा है। सब ओर एक नयी ऊर्जा दिख रही है। नये विस्तृत राजमार्ग बन रहे हैं। नयी स्वच्छ द्रुतगति वाली रेलगाडियों चलने लगी हैं। नयी राजधानी बन रही है। नगरों को स्वच्छ एवं स्मार्ट बनाया जा रहा है। नये-नये प्रकार के उद्योग एवं उद्यम स्थापित हो रहे हैं। कृषि सुदृढ़ हो रही है, कृषि उत्पादन बढ़ रहा है। देश को सब प्रकार से स्वच्छ बनाने के प्रयास हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि लोगों में एक नयी ऊर्जा है। लोग अपने-अपने धर्म के प्रति सजग-सन्निष्ठ हो रहे है। सब में एक नया आत्मविश्वास, नया साहस, नयी उद्यमशीलता एवं नयी प्रतीति दिख रही है।
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