खेकड़ा। कृषि विज्ञान केंद्र में मशरूम उत्पादन तकनीक विषय पर चल रहे प्रशिक्षण शिविर में मशरूम की किस्म के बारे में जानकारी दी गई।
केंद्र के पादप सुरक्षा वैज्ञानिक डा़ॅ शिवम सिंह ने बताया कि सफेद बटन मशरूम की बाजार में सबसे ज्यादा मांग है। इसके लिए कई चरण होते हैं, इनमें पहले खाद बनाना, बिजाई करना, केसिंग करना, फसल प्रबंधन व तुड़ाई शामिल है। इसकी खाद बनाने की दो विधियां हैं। लंबी विधि में खाद की सात पलटाई करनी होती हैं। इसमें 28 से 30 दिन लगते हैं। छोटी विधि में 14 से 16 दिन लगते हैं। सफेद बटन मशरुम की खेती अक्तूबर से मार्च के महीने में की जा सकती है। दूधिया और धान पुआल मशरूम में प्रोटीन की मात्रा ज्यादा होती है। दूधिया मशरूम की खेती करने के लिए कमरे की आवश्यकता होती है। धान पुआल मशरूम की खेती के लिए कमरे की आवश्यकता नहीं होती। इस मौके पर कृषि अभियंत्रण वैज्ञानिक इंजीनियर गौरव शर्मा, किसान नरेश, प्रवीन, मुकेश, विनोद, सोनू, सतेंद्र मौजूद रहे।