मेरठ जिले में हर साल मच्छर जनित बीमारियां पैर पसारती हैं, मगर मलेरिया विभाग इनसे लोगों का पूरी तरह से बचाव नहीं कर पाता इसकी बड़ी वजह स्टाफ की कमी है।
दरअसल, मलेरिया विभाग में मच्छरों से बचाव के लिए छिड़काव और एंटी लार्वा स्प्रे करने वाले 68 पद खाली चल रहे हैं। इसके अलावा विभाग के पास सिर्फ दो गाड़ियां हैं।
ऐसे में मच्छर को पनपने से रोकने के लिए किए जाने वाले प्रयासों को झटका लग रहा है।
लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 16 मई को राष्ट्रीय डेंगू दिवस मनाया जाता है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग लोगों को जागरूक नहीं कर पाता।
जिले में अलग-अलग इलाकों में मच्छरों की अलग-अलग प्रजातियां हैं। ये कई तरह के वायरस और पैरासाइट के जरिए विभिन्न बीमारियां फैलाते हैं। मच्छर बहुत तेजी से बढ़ते और काटते हैं, इसलिए ये मच्छर खतरनाक हैं।
मादा मच्छर की उम्र नर के मुकाबले ज्यादा होती है। डेंगू एक मच्छर जनित गंभीर बीमारी है। यह प्रचलित संक्रामक रोगों में से एक है।
इस रोग से हर साल जिले में काफी संख्या में लोग प्रभावित होते हैं। अब कोरोना कम हो गया है, लेकिन आने वाले दिनों में मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ जाएगा।
डेंगू का हाल-बेहाल
साल डेंगू
2016 195
2017 660
2018 202
2019 215
2020 035
2021 1668
2022 348
रोकथाम के किए जा रहे प्रयास
जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. सत्यप्रकाश ने बताया कि विभाग में स्टाफ की कमी है। इसके लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है। जो संसाधन हैं, उनके जरिए मच्छरों की रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं।