मेरठ। इसे गृहकर विभाग की लापरवाही कहेंगे या फिर सांठगांठ। निगम को 2.50 करोड़ का क्षति पहुंचाई और बाबुओं ने रिकॉर्ड में भवन स्वामियों का गृहकर पूरा चढ़ा दिया। आश्चर्य की बात है कि जानकारी होने के बावजूद भी नगर निगम ने 2023-24 में 69 करोड़ का गृहकर वसूलना बताकर शासन को लिस्ट भेज दी। ऑडिट हुआ, जिसमें गृहकर का भुगतान कम मिला। जांच मेें पता चला है कि चेक से गृहकर का भुगतान किया गया और ये चेक बाउंस कराकर नगर निगम को क्षति पहुंचाई है। जांच के दायरे में निगम के कर्मचारी व बाबू भी हैं।
महानगर में करीब 1.48 लाख भवनों से 2023-24 में 69 करोड़ गृहकर की नगर निगम ने वसूली की, जबकि 2022-23 में सिर्फ 54 करोड़ की वसूली हुई थी। प्रमुख सचिव नगर विकास ने मेरठ के नगर निगम को 146 करोड़ रुपये की कर-करेत्तर की वसूली का लक्ष्य दिया था। निगम ने अभियान चलाकर लोगों से खूब चेक लिए। 2024-25 का गृहकर वसूलने की प्रक्रिया शुरू हो गई। जिसके चलते नगर निगम की ऑडिट टीम ने दो करोड़ रुपये के चेक पर भुगतान न होने की बात पकड़ ली। जबकि गृहकर विभाग के कर्मचारी और बाबुओं ने उक्त चेक का भुगतान होना बताकर अपने रिकॉर्ड में चढ़ा लिया।
भवन स्वामियों से भुगतान होना बताकर उनकी रसीद तक काट दी। चेक बाउंस हुए, इसके बावजूद गृहकर बकाएदारों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। बताया गया कि निगम के अधिकारी और कर्मचारियों की मिलीभगत से ऐसा हुआ है। सवाल उठता है कि अब निगम को 2.50 करोड़ का चूना लगाने वाले भवन स्वामियों पर कार्रवाई होगी या फिर बिना भुगतान हुए रिकॉर्ड में गृहकर आना दर्शाने वालों कर्मचारी या बाबुओं पर। इसका कौन जिम्मेदार है, इसकी समीक्षा शुरू हो गई है।
महीना बीता, भौतिक सत्यापन पर काम नहीं हुआ
गृहकर हो या फिर करेत्तर वसूली में नगर निगम फिसड्डी है। निगम के कर्मचारी, बाबू और अधिकारियों को गृहकर की वसूली में बड़ा खेल है। एंटी करप्शन टीम ने रिश्वत लेते एक साल में तीन कर्मचारियों को रंगेहाथ पकड़ा और फिर जेल भेजा। भ्रष्टाचार में आरोपों से घिरे जीआइएस सर्वे के आधार पर निगम नया गृहकर लागू कराने की जिद पर अड़ा है। निगम की बोर्ड बैठक में पार्षदों ने हंगामा किया, तभी नया गृहकर 3 माह के लिए होल्ड कर भौतिक सत्यापन कराने की बात कही। एक महीना बीत गया और निगम ने अभी कोई काम शुरू नहीं किया।
व्यापारी और पार्षदों में आक्रोश
जीआईएस सर्वे के आधार पर नया गृहकर लेने की तैयारी के विरोध में संयुक्त व्यापार संघ के दोनों गुट शहर के व्यापारियों के संग मिलकर अलग-अलग नगर आयुक्त का घेराव कर चुके हैं। संयुक्त व्यापार संघ अध्यक्ष अजय गुप्ता ने चेतावनी दे रखी है कि अगर नया गृहकर केवल व्यापारियों का शोषण करने वाला है। गृहकर विभाग के कर्मचारी और बाबुओं ने बड़ा खेल किया है। पुराना गृहकर और नए भवनों से वसूली जा जाए तो नगर निगम की आय तीन गुना बढ़ जाएगी।
लेखा विभाग से एक पत्र मिला है, जिसमें 2.50 करोड़ का भुगतान न होना बताया है। गृहकर विभाग के कर निरीक्षकों को लगाया है। 24 घंटे में रिपोर्ट बनाकर नगर आयुक्त को सौंप देंगे। भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया भी जल्द शुरू कराएंगे।
एसके गौतम, मुख्य कर निर्धारण अधिकारी