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Meerut News: दौराला में 35 और लावड़ में 28 साल बाद बदला इतिहास

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लावड़। निकाय चुनाव में इस बार कई रिकॉर्ड बने तो कई टूटे भी। पिछले दो-तीन दशकों से चले आ रहे मिथक को तोड़कर निवर्तमान अध्यक्षों ने अपना परचम लहराया।
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दौराला की बात करें तो 1988 में दौराला नगर पंचायत में अध्यक्ष पद के लिए पहला चुनाव हुआ। रघुराज पहले चेयरमैन बने। लेकिन, इसके बाद कभी भी ओबीसी वर्ग का दौराला में चेयरमैन नहीं बन सका। इस सीट पर 1995 से लेकर 2017 तक एससी वर्ग का कब्जा रहा। 2017 में सामान्य वर्ग के लिए सीट आरक्षित होने पर रीमा शर्मा ने चुनाव जीतकर कब्जा जमाया। 2023 के निकाय चुनाव में ओबीसी वर्ग का सूखा खत्म हुआ। ओबीसी वर्ग से देवेंद्र पाल सिंह ने एकतरफा मुकाबले में रिकॉर्ड जीत हासिल की।
वहीं, आरक्षण प्रणाली लागू होने के बाद से ही 1995 से 2017 तक लावड़ की अध्यक्ष सीट पर सैनी और मोमिन अंसार बिरादरी का कब्जा चला आ रहा था। दूसरी बिरादरी के लोगों ने हर बार हाथ आजमाया, परंतु शिकस्त मिली। लेकिन, बसपा की हज्जन आफताब कुरैशी ने 28 साल से चले आ रहे इस मिथक को तोड़ा। साथ ही कस्बे के इतिहास में सबसे बड़ी जीत हासिल की।
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दौराला से बने चेयरमैन
1988 चौधरी रघुराज सिंह
1995 धर्म सिंह फौजी
2001 कुसुमलता
2006 आशु वाल्मीकि
2012 पिंकी
2017 रीमा शर्मा
2023 देवेंद्र पाल सिंह
लावड़ से बने चेयरमैन
1995 दाताराम सैनी
2000 दाताराम सैनी
2007 अनीसा हारुन
2012 महकार सैनी
2017 अनीसा हारुन
2023 हज्जन आफताब कुरैशी

सभी वर्गों की वोट से हुई जीत : हज्जन आफताब
लावड़। लावड़ की वर्तमान चेयरपर्सन हज्जन आफताब का कहना है कि उन्हें चुनाव में सभी वर्गों का मत मिला। सभी वार्डों से हर जाति, हर धर्म के लोगों ने वोट दी। यहींं जीत का कारण रहा। उन्हें 4160 मत मिले और भाजपा प्रत्याशी अर्चना सैनी को 2241 मत मिले। 1918 वोट से उन्होंने जीत दर्ज की है। चेयरपर्सन हज्जन आफताब का कहना है कि उन्हें चेयरमैन बनाने में सभी कस्बेवासियों का बहुत बड़ा सहयोग है। सभी वर्गों ने उन्हें वोट दी है, लेकिन उनके पति हाजी शकील का भी बड़ा योगदान है। उनके दम पर ही वह लावड़ की चेयरमैन बनी हैं। सभी को साथ लेकर कस्बे में जाति-धर्म से ऊपर उठकर काम करेंगे।

ये है पांच प्राथमिकताएं
1. कस्बे को आदर्श नगर पंचायत का दर्जा दिलवाना।
2. साफ सफाई की व्यवस्था दुरुस्त कराना।
3. नगर पंचायत की भूमि को कब्जा मुक्त कराना।
4. सड़क-नाली को दुरुस्त कराना।
5. सरकार की योजनाओं का लाभ पात्रों को दिलाना।
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