शहर चुनें

अपना शहर चुनें

Top Cities
States

उत्तर प्रदेश

दिल्ली

उत्तराखंड

हिमाचल प्रदेश

जम्मू और कश्मीर

पंजाब

हरियाणा

विज्ञापन

स्वास्थ्य सेवाएं ‘बीमार’, मरीज लाचार

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Thu, 20 Jun 2019 04:50 AM IST
मेरठ के मेडिकल हॉस्पिटल में मरीज - फोटो : अमर उजाला

खास बातें

सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में 103 से ज्यादा चिकित्सक हैं कम
सरकारी चिकित्सालयों में हर साल आते हैं 15 लाख से ज्यादा मरीज
मजबूरी में प्राइवेट में इलाज कराने जाते हैं मरीज, जरूरी सेवाएं भी नहीं हुईं शुरू
 
जिले की स्वास्थ्य सेवाएं ‘बीमार’ हैं। विभाग हर स्तर पर चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। सरकार जोर दे रही है कि मरीज सरकारी चिकित्सालयों में इलाज कराएं। लेकिन हकीकत यह है कि मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों पर 103 से अधिक चिकित्सक मानकों से कम चल रहे हैं। यह हालात तब हैं जबकि ये मानक काफी पुराने हैं। सरकारी चिकित्सालयों में हर साल 15 लाख से ज्यादा मरीज आते हैं। इन्हें ठीक से उपचार नहीं मिल रहा है। जिस कारण बड़ी संख्या में मरीज प्राइवेट अस्पतालों में जाने को मजबूर हो रहे हैं।
विज्ञापन
सीएचसी-पीएचसी पर 20 चिकित्सक कम
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) के अंतर्गत आने वाले चिकित्सकों में 20 चिकित्सक मानकों से कम हैं। सीएचसी-पीएचसी और अर्बन हेल्थ सेंटर आदि पर 182 चिकित्सक होने चाहिए, लेकिन 162 हैं। इनमें अधिकांश जगह सिर्फ एमबीबीएस डॉक्टर हैं, विशेषज्ञ नहीं। 12 सर्जन होने चाहिए, मगर है सिर्फ एक। इसी तरह फिजिशियन और रेडियोलॉजिस्ट भी 12-12 होने चाहिए, लेकिन एक भी नहीं है। गायनिक 15 होनी चाहिए, लेकिन हैं सिर्फ चार।

महिला अस्पताल में 14 स्त्री रोग विशेषज्ञों की कमी
महिला जिला अस्पताल में जहां हर माह एक हजार से ज्यादा डिलिवरी होती हैं, वहां स्त्री रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों का अभाव है। यहां 24 महिला चिकित्सक होनी चाहिए, लेकिन सिर्फ 10 हैं। चार एमबीबीएस भी सीएमओ की तरफ से दी गई हैं, जबकि महिला अस्पताल की प्रमुख अधीक्षक के अंतर्गत आने वाली महिला चिकित्सकों की वहां तैनाती होनी चाहिए।

जिला अस्पताल में 25 चिकित्सक कम
जिला अस्पताल में डॉक्टरों के 54 पद स्वीकृत हैं, जिनमें से 29 चिकित्सक ही कार्यरत हैं। 25 चिकित्सकों की कमी है। इनमें एक सर्जरी (शल्य), दो बेहोशी (निश्चेतक), दो रेडियोलॉजिस्ट, दो अस्थि रोग विशेषज्ञ, दो टीबी एवं चेस्ट रोग विशेषज्ञ, एक-एक नाक-कान गला रोग (ईएनटी), दंत रोग विशेषज्ञ, यूरोलोजिस्ट, न्यूरो सर्जन, न्यूरो फिजिशियन, हृदय रोग, नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी रोग विशेषज्ञ), ब्लड बैंक व आईसीयू के लिए 9 चिकित्साधिकारियों के पद रिक्त चल रहे हैं।

मेडिकल कॉलेज में 44 चिकित्सकों की कमी
मेडिकल कॉलेज में 44 चिकित्सकों व शिक्षकों की कमी है। फार्मेसी में एक सहायक आचार्य (असिस्टेंट प्रोफेसर) का पद खाली है। मेडिसिन में आचार्य (प्रोफेसर), सह आचार्य (एसोसिएट प्रोफेसर) और सहायक आचार्य काएक-एक पद खाली है। रेडियोथेरेपी में रेडियोलॉजिस्ट, सह आचार्य और सहायक आचार्य केएक-एक, रेडियोडायग्नोसिस में सह आचार्य और सहायक आचार्य को दो-दो, एनेस्थीसिया (बेहोशी) आचार्य, सह आचार्य और सहायक आचार्य के एक-एक पद खाली हैं। वहीं, ह्यूमन मेटाबोल्जिम में सह आचार्य और सहायक आचार्य के एक-एक पद, ईएनटी में आचार्य, सहायक आचार्य का एक-एक पद और गायनोकोलोजी में सह आचार्य का एक पद खाली है। इनके अलावा फार्माकोलोजी के सहायक आचार्य के दो पद, फोरेंसिक मेडिसिन में एक पद, कम्यूनिटी मेडिसिन के दो पद, सामान्य मेडिसिन के पांच पद खाली हैं। इतना ही नहीं, न्यूरोलॉजी में सहायक आचार्य का एक पद, टीबी एंड चेस्ट में आचार्य और सहायक आचार्य एक-एक पद, मानसिक रोग विशेषज्ञ के दो पद, बच्चा रोग विशेषज्ञ केछह पद खाली चल रहे हैं। एनाटोमी (मानव संरचना) और माइक्रोबायोलॉजी में दो पद, फिजियोलोजी, बायोकेमिस्ट्री में एक-एक पद खाली चल रहे हैं।
 

चिकित्सकों की कमी कराई जाएगी पूरी
स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों की कमी है, खासकर विशेषज्ञ चिकित्सकों की। शासन को इस संबंध में अवगत कराया जा चुका है।  - डॉ. राजकुमार, मुख्य चिकित्सा अधिकारी

--

शासन से किया जा रहा है पत्राचार
कई विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी है, जिसे पूरा कराने के लिए शासन से पत्राचार किया जा रहा है। डीएनबी कोर्स भी शुरू किया जा रहा है।  - डॉ. पीके बंसल, प्रमुख अधीक्षक, जिला अस्पताल

शासन के संज्ञान में है कमी का मामला

चिकित्सकों और शिक्षकों की कमी का मामला शासन के संज्ञान में है। जो व्यवस्था है, उसी में बेहतर सेवा दी जा रही है।
- डॉ. आरसी गुप्ता, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज

                                       
यह सुविधाएं भी नहीं हो सकी शुरू
मेडिकल कॉलेज
- लेजर तकनीक से आंखों का इलाज
- प्राइवेट वार्ड
- बर्न वार्ड
- रेडियोथैरेपी मशीन

जिला अस्पताल
- नई इमरजेंसी
- एमआरआई
- सभी यूनिटों में ऑक्सीजन प्लांट सुुविधा
- प्राइवेट वार्ड
महिला अस्पताल
- ई-अस्पताल
विज्ञापन

Recommended

medical hospital

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Recommended Videos

Next
Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।