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Meerut News: नहीं मिला इंजेक्शन, हीमोफीलिया के मरीज़ की मौत

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नहीं मिला इंजेक्शन, हीमोफीलिया के मरीज़ की मौत
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- मेरठ में चल रहा 260 मरीज़ों का इलाज

माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। बागपत जिले के पिलाना ब्लॉक के पूठड़ गांव के हीमोफीलिया के मरीज़ आर्यन यादव (15) की मौत हो गई। आरोप है कि उन्हें कहीं भी इंजेक्शन नहीं इंजेक्शन (फैक्टर 8) नहीं मिला। यह इंजेक्शन हीमोफीलिया के मरीज़ को लगाया जाता है।
परिजनों ने बताया कि आर्यन का बागपत में ही इलाज चलता था। तबीयत ज्यादा बिगड़ने पर परिजन उसे पहले मेरठ मेडिकल और फिर दिल्ली ले गए, मगर कहीं हीमोफीलिया का फैक्टर 8 उपलब्ध नहीं हुआ। बागपत में ही उन्होंने एक निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया लेकिन जान नहीं बच सकी। आर्यन दसवीं का छात्र था।
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बड़े भाई को गुड्डू को भी यही बीमारी है।
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मेडिकल कॉलेज में लगभग 260 हीमोफीलिया के मरीज हैं। इनके लिए हर माह लगभग 2000 वायल्स की जरूरत होती है लेकिन पर्याप्त फैक्टर की सप्लाई नहीं हो रही है। मेडिकल में हीमोफीलिया की नोडल अधिकारी डॉ. योगिता सिंह का कहना है कि फैक्टर की कमी नहीं है। कभी ज्यादा मांग आने से ऐसा हो सकता है।
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ब्लड से निकाला जाता है फैक्टर

हीमोफीलिया रक्त से संबंधित एक जेनेटिक बीमारी है। इसमें रक्त का थक्का नहीं बनता। हीमोफीलिया के मरीजों को चढ़ाने के लिए ब्लड से फैक्टर निकाला जाता है। हीमोफीलिया ए के मरीज को फैक्टर सात, हीमोफीलिया बी के मरीज को फैक्टर आठ और हीमोफीलिया सी के मरीज को फैक्टर नौ चढ़ाया जाता है। निजी अस्पताल में एक बार फैक्टर चढ़वाने का खर्चा 10 से 12 हजार रुपये आता है। मेडिकल में निशुल्क है।
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