मेरठ की विश्व में धाक, दुनियाभर से जुड़ेगा : राज्यपाल
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि मेरठ हमारी संस्कृति और सामर्थ्य का महत्वपूर्ण केंद्र है। मेरठ ने रामायण, महाभारत काल से लेकर जैन तीर्थंकरों और पंच प्यारों (एक भाई धर्म सिंह) तक ने देश की आस्था को ऊर्जावान किया है। मेरठ हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद की कर्मस्थली रहा है। यहां मेजर ध्यानचंद के नाम पर खेल विवि का निर्माण हो रहा है। खेल विवि बनने से यहां राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार होंगे। खेल के सामान का मेरठ बहुत बड़ा बाजार है और इसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान है। मेरठ को भारत का खेल शहर भी कहा जाता है। मेरठ के बैट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर छा रहे हैं। कैंची और हथकरघा उत्पाद भी अपनी खासी पहचान रखता है। इसके आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक महत्व और उत्पादन की सुगम सप्लाई के लिए एक्सप्रेसवे बन गया है। रैपिड ट्रेन और हवाई अड्डा बनने जा रहा है, ताकि मेरठ न सिर्फ देश बल्कि विश्वभर से जुड़ सके।
रैकिंग में सुधार से विदेश विवि कर रहे एमओयू
सीसीएसयू शिक्षा के क्षेत्र में लगातार नये मुकाम हासिल कर रहा है। विवि ने नैक रैकिंग में ए प्लस-प्लस प्राप्त किया है। साउथ एशिया की क्यूएस रैकिंग में 219वां स्थान प्राप्त किया। विवि का उद्देश्य केवल रैंकिंग के लिए प्रयास करना नहीं, बल्कि शिक्षा प्राप्त करने के लिए विश्वस्तरीय प्लेटफार्म तैयार करना है। सभी का मूल उद्देश्य वैश्विक स्तर पर अपने विवि को समकक्ष स्थान प्राप्त कराते हुए विश्व में भारत का गौरव बढ़ाना है। विवि की रैकिंग में सुधार होने से आज विदेशी विवि हमारे विवि के साथ एमओयू साइन कर रहे हैं।
मां को मेडल पहनाकर आशीर्वाद लें
राज्यपाल ने कहा बच्चों की प्रगति में अहम योगदान मां का होता है, इसलिए मेडल प्राप्त करने वाले सभी छात्र-छात्राएं मेडल अपनी मां को समर्पित करें। घर जाकर सबसे पहले मेडल मां के गले में डालकर पैर छूकर आशीर्वाद लें। मां की व्याख्या करते हुए बताया मां अलार्म है, मां कुक है, मां शिक्षक है, मां रिसेप्शनिस्ट है, मां नर्स है, मां महारानी है। जीवन में मां के प्रति अपने दायित्व को कभी नहीं भूलना चाहिए।
इसलिए रतन टाटा करते हैं सबसे ज्यादा दान
राज्यपाल ने बताया कि विश्वभर से दानदाताओं में सबसे ऊपर रतन टाटा उद्योगपति का नाम आता हैं। इसकी वजह बताते हुए बताया कि एक एनजीओ ने उनसे दिव्यांगों के लिए ट्राइसाइकिल दिलाने की बात कही। एनजीओ के लोगों ने बच्चों की संख्या पांच सौ बताई, मगर 100 ट्राइसाइकिल मांगी। इसकी वजह यह रही कि कहीं वे 500 ट्राइसाइकिल देने से इन्कार न कर दें। यह बात उन्होंने भांप ली और तय समय पर 500 ट्राइसाइकिल पहुंचा दीं। जब वह कार्यक्रम में पहुंचे तो हर बच्चों को चहकता देखकर उन्हें काफी खुशी मिली। तभी से वह उसी खुशी के लिए सबसे ज्यादा दान करते हैं।
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