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मनुष्य के कण-कण में भगवान का वास होता है : महेश कृष्ण

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नानपुर में कथा सुनाते व्यास पडिंत महेश कृष्ण
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किठौर। रसूलाबाद नानपुर स्थित दुर्गा शिव मंदिर में सनातन धर्म रक्षा वाहिनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामदास महाराज के सानिध्य में चल रही श्रीमद् भागवत सप्ताह पारायण यज्ञ के तीसरे दिन कथा वाचक पंडित महेश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि भगवान नरसिंह अवतार की कथा सुनाते हुए बताया कि प्रभु जीव और निर्जीव दोनों में समान रूप से व्याप्त हैं। कण-कण में भगवान का वास है। वामन अवतार की कथा के माध्यम से उन्होंने बताया कि जो मांगने वाला होता है। वह सदैव छोटा अर्थात विनम्र होता है। प्रभु जब राजा बलि के द्वार भिक्षा मांगने गये तो स्वयं वामन रूप धारण कर छोटे बन गए। यह प्रसंग मानव जीवन में विनम्रता और त्याग का संदेश देता है।प्रथम बार राजा परीक्षित ने सुखदेवजी के मुखारविंद से श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण किया था। परीक्षित शब्द की व्याख्या करते हुए कहा कि इस पृथ्वी पर जितने भी मनुष्य हैं। वे सभी परीक्षित हैं। रीक्षित का अर्थ है, जो दूसरे के द्वारा रक्षित होता है। हम सभी किसी न किसी रूप में एक-दूसरे पर आश्रित और सुरक्षित हैं। इसलिए हम सभी परीक्षित हैं। भगवान के दशावतार की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जब-जब पृथ्वी पर धर्म की हानि होती है। तब प्रभु मानवों को मार्गदर्शन देने के लिए विभिन्न रूपों में अवतरित होते हैं। इस दौरान रविन्द्र मोरल, राजवीर मोरल, वीरेंद्र मोरल, अजय, संदीप,सतवीर शर्मा आदि मौजूद रहे।
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