जिम्मेदार पुलिस, कार्रवाई पर चुप्पी
प्रहलादनगर लिसाड़ीगेट थाने से एकदम सटा हुआ है। इसके बावजूद यहां के लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। पुलिस हर त्यौहार से पहले दोनों समुदाय के लोगों की मीटिंग कर समस्याएं सुलझाने का दावा करती है। सवाल यह है कि अगर समस्याएं सुलझाई थीं, तो ऐसी नौबत क्यों आई कि मामला पंचम तल तक पहुंच गया। इस मामले में पुलिस चुप्पी साधे है।
अल्पसंख्यकों से नहीं, बाहरी लोगों से दिक्कत
प्रहलादनगर में भाजपा पार्षद जितेंद्र पाहवा, पूर्व पार्षद इंद्रजीत कथूरिया, भावेश मेहता (नमो एप पर शिकायत करने वाला), रामकुमार, विनोद, आमोद वैद्य समेत करीब 50 लोगों से बातचीत की गई। सभी ने एक जैसी ही बात बताई। इनका कहना है कि यह मामला पलायन का नहीं है। मामला असामाजिक तत्वों की मौजूदगी, छेड़छाड़, स्टंटबाजी और फायरिंग का है। इनका कहना है कि प्रहलादनगर के चारों तरफ अल्पसंख्यक लोग रहते हैं, लेकिन उनसे कोई दिक्कत नहीं है। लिसाड़ी रोड का ट्रैफिक यहां से गुजरता है। बाहरी लोग आकर गुंडागर्दी करते हैं। इसके चलते ही लोग यहां से घरों को बेचकर जा रहे हैं। पुलिस ने एक बार भी उनकी समस्या पर सुनवाई नहीं की।
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