मोहित के बड़े भाई वकील ने बताया कि करीब 15 साल पहले भतीजे आदेश की भी कांवड़ यात्रा के दौरान सड़क हादसे में मौत हो गई थी। परिवार ने पैरवी की और करीब एक लाख रुपये खर्च हो गए, लेकिन कोई आर्थिक सहायता नहीं मिल सकी। समाज की ओर से भी कोई मदद नहीं मिली।
छह साल पहले हुई थी माता की मौत
परिवार के लोगों ने बताया कि करीब छह वर्ष पूर्व मोहित की माता चंद्रो देवी भी बाईपास पर कोहरे में सड़क हादसे का शिकार हो गई थीं, लेकिन किसी प्रकार की कोई सहायता नहीं मिली थी, इसलिए उन्होंने मोहित की मौत के विषय में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं कराई है। वे मजदूर हैं, पैरवी करने के लिए इतने रुपये कहां से लाएं। मृतक मोहित के बड़े भाई वकील ने बताया कि वे छह भाई-बहन थे। मोहित सबसे छोटा था। मोहित के अन्य भाई सुशील, वकील, नीरज उर्फ़ सुक्का और अर्जुन हैं। उधर, भीम आर्मी के कार्यकर्ताओं ने गांव पहुंचकर मामले की जानकारी ली।
पुलिस बोली, पिटाई नहीं, बीमारी से हुई मौत
गांव रायपुर नंगली निवासी मोहित (22) की ई-रिक्शा कांवड़ियों से टकरा गई थी। कांवड़ियों ने मोहित की पिटाई कर दी थी। परिजन उपचार कराने के बाद मोहित को घर ले गए, लेकिन रविवार को उसकी मौत हो गई थी। इस मामले में पुलिस ने बयान जारी कर कहा कि मोहित की मौत पिटाई से नहीं, बल्कि पुरानी बीमारी से हुई है।