माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट में किए निरीक्षण के दौरान जिला अस्तपाल में ऑक्सीजन पाइप में गड़बड़ी मिली। इसके अलावा रोहटा सीएचसी में स्टेपलाइजर खराब पाया गया। मंडलीय सर्विलांस टीम द्वारा रिपोर्ट सीएमओ को दी गई। मॉक डि्रल के दौरान प्लांट की खपत, मशीन की क्षमताओं की भी जांच की गई।
स्वास्थ्य विभाग के आदेश में मंडलीय सर्विलांस टीम द्वारा शहर के 14 सरकारी अस्पतालों में जांच की गई। इसमें जिला अस्पताल, महिला जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज के साथ पीएचसी में विभिन्न अधिकारियों के द्वारा जांच की गई। जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि अस्पताल में वर्ष 2021 में प्लांट लगाया गया। अभी तक प्लांट 2 हजार घंटे चला है। 250 बेड पर आक्सीजन की सप्लाई दी जाती है। वहीं, जिला महिला अस्पताल में 100 बेड पर ऑक्सीजन की सप्लाई होती है। मंडलीय सर्विलांस अधिकारी डॉ. अशोक तालियान ने बताया कि जिला अस्पताल में पाइपलाइन में गड़बड़ी थी। ऐसे में दो दिन का समय देकर वेंडर को समस्या ठीक करने के लिए आदेशित किया गया है। महिला जिला अस्पताल में प्लांट सही पाया गया। इस दौरान सुदेश कुमार, अभिषेक वालिया आदि रहे।
मेडिकल कॉलेज में प्लांट की क्षमता जांची
मेडिकल कॉलेज में सर्विलांस अधिकारी डॉ. अजय पंवार की टीम द्वारा निरीक्षण किया गया। अनेस्थिसिया अधिकारी डॉ. विपिन धामा ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में दो प्लांट हैं, इनसे बच्चा रोग विभाग, जर्नल सर्जरी और अन्य वार्ड में सप्लाई दी जाती है। दोनों आक्सीजन प्लांट की लाइन आपस में जुड़ी हुई हैं। लिक्विड ऑक्सीजन, सिलेंडर, ऑक्सीजन जेनरेशन प्लांट यानी तीन माध्यमों से आक्सीजन की सप्लाई की जाती है। जांच के दौरान मशीन कितने घंटे चली, किस महीने आक्सीजन की कितनी खपत रही, आक्सीजन का फ्लो आदि की जांच की गई।
गड़बड़ी सुधारने के दिए आदेश
मॉक डि्रल के दौरान मेरठ के 14 अस्पतालों में सर्विलांस टीम द्वारा जांच की गई। इसमें जिला अस्पताल और रोहटा सीएचसी में गड़बड़ी मिलने पर सुधार के आदेश दिए गए हैं। टीम द्वारा संपूर्ण जानकारी अपलोड की जा रही हैं। इसके साथ ही ऑनलाइन डेटा और गूगल फार्म आदि के विषय में भी जानकारी दी गई।
- अशोक कटारिया, सीएमओ।