बेटी का जन्मदिन मनाने के बाद मौत के आगोश में सो गया परिवार
मेरठ। एक ओर लोग नए साल का जश्न मना रहे थे, तो वहीं दंपती चार साल की मासूम के साथ ऐसे सोया कि परिवार नए साल का पहला दिन तक नहीं देख पाया। बच्ची 14 घंटे तक तड़पती रही। अगर कोई जाकर देख लेता कि दंपती दोपहर तक क्यों नहीं जागे तो शायद बच्ची की जान बच सकती थी।
दरअसल, शंभूूनगर में शाम चार बजे जब मकान मालिक आलोक बंसल तृतीय तल पर पहुंचे तो जीने का गेट बाहर से बंद था। उन्होंने जाली काटकर दरवाजा खोला। इसके बाद दंपती के कमरे का दरवाजा तोड़कर देखा तो वह दंग रह गए। दंपती ने दम तोड़ दिया था। बच्ची की सांसें चल रही थीं। उन्होंने बच्ची को अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मृत्यु हो गई।
नए साल और बेटी का जन्मदिन मनाने के लिए दंपती देर रात तक नहीं सोए थे। रात करीब दो बजे वह नीचे से कोयले का तसला लेकर ऊपर पहुंचे थे। इसके बाद वह नीचे नहीं आए। मकान मालिक आलोक बंसल पत्नी के साथ नववर्ष की पार्टी मनाने के लिए होटल गए थे। उनकी मां और बेटी घर पर थे। बेटा दोस्तों के साथ घर के बाहर कोयले से हाथ ताप रहा था, जबकि कोठी के तृतीय तल पर नौकर दंपती और उनकी बेटी थे। मकान मालिक ने बताया कि वह रविवार सुबह 11 बजे सोकर उठे। स्नान करने के बाद मंदिर में पूजा करने चले गए। उन्होंने कोठी में भी पूजा का आयोजन था। 12 बजे पंडित कोठी पर पहुंच गए। इसके बाद परिवार के लोग पूजा में लग गए। नेपाली नौकर चंदर को उन्होंने फोन मिलाया, लेकिन नहीं उठा। उसी समय वह ऊपर जाते तो शायद जान बच सकती थी।
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बहुत ही चंचल थी मासूम
मकान मालिक ने बताया कि दंपती की बेटी अंजलि बहुत ही चंचल थी। पूरा दिन नीचे ही खेलती थी। पड़ोसी भी उससे प्यार करते थे। चंदर के दो बच्चे और भी हैं, जो नेपाल में रहते हैं।
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कमरे में नहीं कोई वेंटिलेशन
कोठी की तीसरी मंजिल पर सर्वेंट रूम में दरवाजे के अलावा एक खिड़की है। सर्दी के कारण यह बंद थी। अन्य कोई वेंटीलेशन नहीं है। कमरे में कोयला सुलगने के कारण गैस बन गई थी। इससे हादसा हो गया।
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तीन दिन पहले ही कमरे में कोयला जलाने को मना किया था
- आलोक ने बताया कि तीन दिन पहले ही चंदर को कमरे में कोयला सुलगाने से मना किया था, लेकिन उन्हें क्या पता था कि अब इस तरह का हादसा हो जाएगा।
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कमरे से आ रही थी बदबू
रविवार दोपहर चार बजे सर्वेंट रूम को खोला गया। तीनों शवों के मोर्चरी ले जाने के बाद पुलिस ने कमरे को बंद कर दिया था। करीब सात बजे फोरेंसिक टीम शंभूनगर सैंपल लेने के लिए पहुंची। फोरेंसिक टीम ने जैसे ही दोबारा से कमरा खोला तो उसमें से बदबू आ रही थी। कमरे में देखा तो कोयले से भरा तसला बेड से कुछ दूरी पर ही रखा हुआ था। बेड शीट भी सनी हुई थी। लग रहा था कि दम घुटने से उन्हें उल्टी भी लगी होगी।