किसानों को मिलेगी अच्छी कीमत
जिले में ही बासमती की कुटाई होने के बाद चावल सीधे निर्यात होगा तो किसानों को भी इसका फायदा मिलना तय है। ऐसे में बासमती की मांग बढ़ जाएगी। धान खरीदकर करनाल और दूसरी जगहों पर पहुंचाने वाले बिचौलिए भी गायब हो जाएंगे। किसान सीधे चावल मिल में धान बेचेंगे तो मुनाफा भी बढ़ेगा।
चीनी यात्री हेन त्सांग हर्षवर्धन के शासन काल में भारत आया। बताया जाता है कि वह नगीना के रास्ते बिजनौर भी पहुंचा था और मंडावर में भी रहा। उसने भारत के बारे में अपनी किताब में लिखते हुए नगीना के बासमती धान की खुशबू का जिक्र किया था। बता दें कि पहले बिजनौर में बासमती धान की एक ऐसी प्रजाति थी, जिसके खेत के पास से निकलने पर ही चावल की महक आती थी।
धान के रकबे पर एक नजर
प्रजाति रकबा हेक्टेयर में
बासमती 34 हजार
मोटा धान 14 हजार
संकर धान 08 हजार
दुबई के एक चावल निर्यातक से बात चल रही है, जो बिजनौर में निवेश करते हुए उन्नत तकनीक वाली चावल मिल की स्थापना करेगा। इस मिल में बासमती का चावल टूट नहीं पाएगा। जिससे एक अच्छी प्रजाति के चावल का जिले से सीधे ही निर्यात हो सकेगा - उमेश मिश्रा, डीएम