सहारनपुर। सहारनपुर प्रदेश की पहली लोकसभा सीट है। चार दिन पहले भाजपा आला कमान ने अधिकतर सीटों पर प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया, लेकिन पश्चिम में सहारनपुर और मेरठ समेत कई सीटों पर सस्पेंस बरकरार रहा है। पिछले कुछ चुनावों पर नजर डालें तो हर बार सहारनपुर सीट पर पहली सूची में प्रत्याशी के नाम घोषणा की गई, लेकिन इस बार आला कमान के इस फैसले ने न केवल दावेदारों की नींद उड़ा रखी है, बल्कि विपक्षी दलों में भी बैचेनी बढ़ गई है।
बताया जा रहा है कि 2019 में मिली बेहद नजदीक की हार से आला कमान इस बार पूरे मंथन में जुटा हुआ है। राजनीतिक सूत्रों की मानें तो सहारनपुर सीट के लिए एक या दो नहीं, बल्कि पांच-छह दावेदार हैं, जो अलग-अलग समीकरण बैठाकर खुद की जीत के दावे आला कमान के सामने कर रहे हैं। दरअसल, आजादी के बाद सहारनपुर सीट 1996, 1998 और 2014 में ही भाजपा के हिस्से में आई है।
- कांग्रेस में चौंकाने वाला हो सकता है प्रत्याशी
जिस तरीके से भाजपा सहारनपुर सीट पर सस्पेंस बनाए हुए है वहीं गठबंधन में कांग्रेस के खाते में यह सीट जाने के बाद वहां पर भी सस्पेंस बना हुआ है। कांग्रेस से भी कई दावेदार मैदान में उतरने के लिए तैयार हैं। पूर्व विधायक इमरान मसूद के अलावा पूर्व एमएलसी गजे सिंह और जिलाध्यक्ष मुजफ्फर अली भी दावेदारी ठोक रहे हैं, लेकिन कांग्रेस किस पर दांव खेलेगी यह अभी स्पष्ट नहीं है। पूर्व एमएलसी पिछले कुछ दिनों से दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। जो आला कमान के सामने जीत के दावे कर रहे हैं। पूर्व विधायक इमरान मसूद की तरह वह भी खुलकर कह रहे हैं कि उन्हें टिकट मिलेगा, अब पार्टी किस पर दांव खेलेगी इसका पत्ते भी जल्द ही खुल जाएंगे।
- 2019 में यह था चुनाव परिणाम
सहारनपुर लोकसभा सीट को मुस्लिम बाहुल्य माना जाता है। हालांकि अन्य वर्ग की भी चुनाव में अहम भूमिका होती है। 2019 के चुनाव पर नजर डालें तो बसपा के हाजी फजलुर्रहमान ने 514139 वोट लेकर जीत हासिल की थी। जबकि भाजपा के राघव लखनपाल करीब 22 हजार वोटों से हार गए थे। तीसरे स्थान पर कांग्रेस के इमरान मसूद रहे थे।