विद्युत कर्मचारियों की हड़ताल से शहर में बिजली संकट बढ़ता जा रहा है। शनिवार को बारिश के कारण फाल्ट हो गए। समय से फाल्ट ठीक न होने से आधे शहर की बिजली गुल हो गई। दोपहर ढाई बजे से रात साढ़े दस बजे तक भी कई इलाकों में बिजली आपूर्ति सुचारु नहीं हो सकी। वहीं पीवीवीएनएल ने हड़ताल में शामिल मेरठ जोन के 140 संविदा कर्मियों की सेवा समाप्त करने के लिए संबंधित कंपनी को पत्र लिखा है। बिजली न आने के कारण जागृति विहार, साकेत, देवलोक, ब्रह्मपुरी, बेगमपुल, कांठ का पुल, जाकिर काॅलोनी, मोहिउद्दीनपुर समेत कई क्षेत्रों में पानी भी नहीं मिला।
पीवीवीएनएनएल और जिला प्रशासन की ओर से बनाए गए कंट्रोल रूम पर फाल्ट संबंधी शिकायतों की संख्या बढ़ती जा रही है। शनिवार शाम तक कंट्रोल रूम पर शहर की 454 से अधिक शिकायतों का निस्तारण समय से नहीं हो सका। शनिवार को मेरठ जोन में 250 बार ब्रेकडाउन हुआ।
14 जिलों की 10 हजार से अधिक शिकायतें कंट्रोल रूम पर दर्ज कराई गई हैं। शनिवार शाम 7 बजे तक 5800 शिकायतों का निस्तारण नहीं हो पाया। जागृति विहार, हाइडिल कालोनी, घंटाघर, साकेत, मोहिउद्दीनपुर, लोहियानगर, काजीपुर, श्यामनगर, विकासपुरी क्षेत्र की समस्याएं अधिक रहीं। उधर विद्युत कर्मचारी ऊर्जा भवन पर धरने पर डटे रहे। मुख्य अभियंता अनुराग अग्रवाल ने बताया कि हड़ताल के कारण विद्युत आपूर्ति प्रभावित है। बारिश के बाद मुसीबत और बढ़ गई है। इस कारण कई जगहों पर कार्य नहीं हो पा रहे हैं, जिसके चलते हड़ताल में शामिल होने वाले 140 कर्मचारियों की सेवा बर्खास्त करने के आदेश जारी किए गए हैं।
50 से अधिक गांव प्रभावित
ब्रेकडाउन के कारण देहात की बिजली गुल रही। पीपली खेड़ा, सिसौली, गंगानगर प्रथम, द्वितीय, फफूंडा, खरखौदा, सियाल, गोकलपुर, पसवारा, सरूरपुर समेत करीब 50 से अधिक गांवों में दोपहर दो बजे के बाद विद्युत आपूर्ति देर रात तक प्रभावित रही।
कांउटरों पर लगे रहे ताले
मेरठ जिले में शहर और देहात को मिलाकर 175 बिजलीघर हैं। शहर में 50 बिजलीघर हैं, जहां बिजली बिल जमा होने, बिल संशोधन, नए संयोजन, भार वृद्घि समेत कोई कार्य हड़ताल के कारण नहीं हो सका। बिजली बिल काउंटरों और अधिकारियों के कार्यालयों पर भी ताले पड़े रहे। उपभोक्ता नए कनेक्शन व बिजली समस्याओं को लेकर चक्कर काटते रहे, लेकिन उनके कार्य नहीं हो सके। उधर उत्तर प्रदेश पूर्व सैनिक कल्याण बोर्ड के तहत सेना से सेवानिवृत्त कर्मचारियों को बिजली घरों पर तैनात किया गया। शहर में सभी पांचों डिविजन में 320 कर्मचारी तैनात हैं। जहां कहीं से भी फाल्ट संबंधी सूचना मिली उसे अधिकारियों तक पहुंचाने का कार्य उनकी ओर से किया गया।
ऊर्जा भवन पर डटे रहे कर्मचारी, जेल जाने को भी हैं तैयार
प्रदेशव्यापी हड़ताल के चलते विद्युत कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर शनिवार को भी ऊर्जा भवन पर धरने पर डटे रहे। उन्होंने ऊर्जा प्रबंधन की हठधर्मिता के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारी परिषद से सह संयोजक आरए कुशवाहा ने कहा कि कर्मचारी हड़ताल के पीछे नहीं हटेंगे। शासन की ओर से कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कराने की बात कही गई है। कर्मचारी इससे भी पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा कि हम जेल जाने के लिए भी तैयार हैं। जब तक उनकी मांगों पर कोई निर्णय नहीं होता हड़ताल खत्म नहीं होगी। कर्मचारी बारिश के दौरान भी हड़ताल पर जमे रहे। धरने में काफी संख्या में महिला कर्मचारी भी मौजूद रहीं। दिलमणि थपलियान, राजेन्द्र बहादुर, रोहित सिंह, सीपी सिंह, सुमित पाल, भूपेन्द्र कुमार समेत आदि मौजूद रहे।
ये हैं कर्मचारियों की प्रमुख मांगें
- 3 दिसंबर 2022 को ऊर्जा मंत्री के साथ हुई समझौता वार्ता का क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए
- ओबरा व अनपरा में स्थापित की जा रही नई बिजली परियोजनाओं का उत्पादन निगम को दिया जाए
- पारेषण के नए बनने वाले सभी विद्युत उपकेंद्रों एवं लाइनों का कार्य यूपी पावर ट्रांस्को को दिया जाए
- वर्ष 2000 के बाद में सभी बिजली कर्मियों के लिए पुरानी पेंशन की व्यवस्था लागू की जाए
- बिजली निगमों का एकीकरण कर यूपीएसईबी लि. का गठन किया जाए
- संविदा कर्मचारियों को नियमित किया जाए
ऊर्जा राज्यमंत्री ने किया निरीक्षण
ऊर्जा राज्यमंत्री डॉ. सोमेन्द्र तोमर ने ऊर्जा भवन में बनाए गए कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हड़ताल के कारण आने वाली समस्याओं का जल्द से जल्द निस्तारण किया जाए। सभी शिकायतों का तुरंत निस्तारण किया जाए। इस दौरान प्रबंध निदेशक पीवीवीएनएल चैत्रा वी व अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
समस्याओं का समाधान होगा
हड़ताल के कारण विद्युत आपूर्ति प्रभावित न हो इसके लिए व्यवस्था बनाई गई है। कंट्रोल रूम पर आने वाली शिकायतों का तुरंत निस्तारण कराया जा रहा है। उपभोक्ताओं की समस्याओं का समाधान किया जा रहा है। - चैत्रा वी, प्रबंध निदेशक पीवीवीएनएल
कर्मचारी नहीं हटेंगे पीछे
सरकार कर्मचारियों के शांतिपूर्ण आंदोलन को अलोकतांत्रिक तरीके से कुचलने का प्रयास कर रही है। कर्मचारी पीछे नहीं हटेंगे। - शैलेंद्र दुबे, संयोजक, उप्र विद्युत संघर्ष समिति