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मधुमेह के रोगी खा सकेंगे बासमती की प्रजाति मसूरी : डॉ नैसे

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मोदीपुरम। सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में सोमवार को अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान मनीला फिलीपींस के प्रधान वैज्ञानिक डाॅ. नैसे श्रीनिवास नुलु ने बासमती की प्रजातियों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मधुमेह के रोगी बासमती की प्रजाति मसूरी का सेवन कर सकेंगे।
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डॉक्टर श्रीनिवास नुलु ने कहा इस पूरे विश्व में देखा गया है चावल में कार्बाेहाईड्रेट की मात्रा अधिक होने के कारण मधुमेह से पीड़ित रोगी इसे नहीं खाते हैं। इसे खाने से भोजन लेने के 20 मिनट के अंदर रक्त के अंदर ग्लूकोज की मात्रा बहुत ज्यादा बढ़ जाती है। किसी भी अनाज के इस गुण को अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स कहा जाता है, क्योंकि पूरे विश्व में चावल पर निर्भरता सबसे अधिक है और यह बहुत अधिक मात्रा में उपलब्ध भी है। अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान मनीला फिलीपींस के वैज्ञानिक नैसे श्रीनिवास नुुलू द्वारा भारत में प्रचलित बासमती धान की प्रजाति मसूरी के अंदर इस प्रकार के गुणों का समावेश किया गया है कि उसमें प्रोटीन लगभग 14 प्रतिशत फाइबर की मात्रा भी अधिक है।
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान मनीला के परामर्शदाता डॉक्टर यूएस सिंह ने कहा कि यह संस्थान भारत में भी अच्छा कार्य कर रहा है भविष्य में किसानों को बासमती धान की और अधिक गुणवत्ता युक्त प्रजातियां मिल सकेंगी भारत में चल रहे शोध केंद्रों पर इस तरह का कार्य तेजी से किया जा रहा है। इस प्रशिक्षण के संयोजक प्रोफेसर रामजी सिंह, निदेशक ट्रेनिंग प्लेसमेंट प्रोफेसर आर एस सेंगर, अधिष्ठाता हॉर्टिकल्चर डॉ विजेंद्र सिंह, डॉक्टर यूपी शाही, डॉक्टर पूरन चंद, डॉक्टर वैशाली, डॉ मुकेश कुमार, मनोज यादव, डॉ कमल खिलाड़ी, डॉक्टर गोपाल सिंह आदि लोग मौजूद रहे।
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