दसलक्षण धर्म के तीसरे दिन रविवार को दिगंबर जैन पंचायती मंदिर आनंदपुरी में इंद्रों ने पार्श्वनाथ भगवान की प्रतिमा को पांडुक शिला पर विराजमान कर भक्तिभाव से श्रीजी का जलाभिषेक किया। शंतिधारा का सौभाग्य सचिन जैन और संजीव जैन को मिला। पार्श्वनाथ भगवान की पूजा की गई। मवाना से आए प्रतिष्ठाचार्य नवरत्न उत्साही पारस शास्त्री ने उत्तम आर्जव धर्म के बारे में बताया कि आर्जव का मतलब सरलता अर्थात मन वचन कार्य से कुटिलता नहीं करना ही आर्जव धर्म है। मनुष्य का जीवन सांप के समान है। सांप टेढ़े मेढ़े होकर चलता है, लेकिन बिल में जाने के लिए उसे सीधे घुसना पड़ता है। धोखा खाना बुरी बात नहीं है बल्कि धोखा देना बुरी बात है। मुनि संघ प्रवक्ता सुनील जैन ने बताया कि विश्व शांति ढाई द्वीप महामंडल विधान में विजय मेरु संबंधी उप विजयार्ध जिनालय की पूजा की जाएगी। सांयकालीन सभा में सामूहिक णमोकार मंत्र का पाठ, आरती की गई और सांस्कृतिक कार्यक्रम में बच्चों का फैंसी ड्रेस का कार्यक्रम हुआ। प्रदीप जैन, अरुण जैन, अनिल जैन, अभिषेक जैन, गौरव जैन, रजत जैन, अतुल जैन आदि का सहयोग रहा।