मेरठ। राली चौहान गांव में अभी मृतकों के परिजनों के आंसू सूखे भी नहीं हैं कि एक पीड़ित परिवार पर गमों का पहाड़ फिर टूट पड़ा। कांवड़ यात्रा हादसे में मरने वाले लख्मी (45) के मासूम बेटे करन (10) की शनिवार रात संदिग्ध हालात में मौत हो गई। करन चौथी कक्षा का छात्र था। सर्पदंश से मौत की आशंका जताई जा रही है। परिजनों ने बिना पोस्टमार्टम कराए शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
परिजनों के मुताबिक शनिवार रात को करन चाचा प्रीतम के घर में खाना खाने के बाद सो गया था। कमरे में जमीन पर उसकी मां रेखा, दो बड़े भाई प्रवीन और लकी भी सो रहे थे। रात दो बजे के करीब अचानक वह सीने में दर्द होने की बात कहते हुए रोने लगा। परिवार के सभी सदस्य उठ गए। उन्होंने देखा कि कमरे में एक सांप था। परिजनों ने उसे मार दिया। सांप के काटने की आशंका के चलते परिजन उसे जिला अस्पताल लाए। चिकित्सकों ने जांच की, लेकिन सांप के काटे जाने की पुष्टि नहीं हुई। करन की नाजुक हालत देखते हुए उसे मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। सूचना पर भावनपुर थाना प्रभारी अतर सिंह मौके पर पहुंचे। परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इन्कार कर दिया। पुलिस ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे नहीं माने। शव का पंचनामा भरने के बाद पुलिस लौट गई। परिजनों ने गांव के श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया।
ग्रामीण बोले- पिता की मौत के बाद गमगीन था करन
गांव में इस बात को लेकर चर्चा रही कि पिता लख्मी की मौत के बाद से करन गुमसुम रहता था।
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आठ दिन में उठीं देहरी से तीन अर्थियां, मचा चीत्कार
पिता-पुत्र और भतीजे की हो चुकी है मौत, रो-रोकर परिजनों का बुरा हाल
माई सिटी रिपोर्टर
मेरठ। राली चौहान गांव में आठ दिन में दो मौत से सैनी समाज के इस परिवार में कोहराम मचा है। रो-रोकर परिजनों की आंखें सूज चुकी हैं। रोजाना घर पर परिचित ढाढ़स बंधाने आ रहे हैं। अभी पहाड़ जैसे इस दुख से परिवार उबर भी नहीं पाया था कि शनिवार आधी रात को लख्मी के मासूम बेटे करन की भी मौत हो गई। शव घर पहुंचा तो आंसुओं का सैलाब बहने लगा। चीत्कार मच गया। मां रेखा बेसुध हो गई। चीखती रही कि मैं कैसे जीऊंगी। मेरा तो सबकुछ छिन गया।
कांवड़ यात्रा के दौरान हाईटेंशन लाइन की चपेट में आकर छह लोगों की मौत से राली चौहान गांव में अभी तक मातम का शोर खत्म नहीं हुआ कि शनिवार को ये हादसा हो गया। गांव में जगह-जगह लोग यही कहते रहे कि ये क्या हो रहा है। परिवारों का दर्द खत्म नहीं हुआ कि एक और दर्द मिल गया।
गांव के भगीरथ सैनी के छह बेटे थे। इनमें प्रीतम, श्याम सिंह, विनोद, लख्मी, शेरसिंह और सुनील शामिल हैं। चौथे नंबर के लख्मी का बेटा प्रवीण और तीन भतीजे 15 जुलाई को कांवड़ लेकर आए थे। गांव के बाहर कांवड़ पहुंचने पर परिवार के लोग देखने गए थे। कांवड का डीजे फ्रेम 11 हजार केवी की लाइन से छूने पर ट्रैक्टर ट्रॉली में करंट उतार आया था, जिससे लख्मी की मौके पर मौत हो गई थी। इस दर्दनाक हादसे में लख्मी के छोटे भाई सुनील के 10 वर्षीय बेटे लक्ष्य की भी मौत हो गई थी। एक साथ घर से दो अर्थियां उठी थीं। ताऊ-भतीजे की चिता सामूहिक रूप से बनाई गई थी।
लख्मी के परिवार के पास नहीं है घर
लख्मी मजदूरी करके पत्नी और तीन बच्चों प्रवीण (9) लकी (6) और करन (10) का पालन पोषण करता था। परिवार के पास पक्का मकान भी नहीं है। लख्मी की मौत के बाद से परिवार दूसरे भाई के घर ही रह रहा है।
चचेरे भाई ने किया अंतिम संस्कार
करन के शव का अंतिम संस्कार चचेरे भाई ने किया। अंतिम संस्कार में शामिल लोग भर्राये गले से यही कहते रहे कि परिवार में आठ दिन में तीन मौत हो गईं। इससे बड़ा गम और नहीं हो सकता है।