वर्ष 2003 में पंचकल्याणक में शामिल हुए थे मध्यप्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज चौहान
महावीर स्वामी दिगंबर जैन प्रमागम मंदिर कमेटी के अध्यक्ष विनोद कुमार जैन एडवोकेट और अजितनाथ दिगंबर जैन मंदिर कमेटी के मीडिया प्रभारी वरदान जैन ने बताया कि प्रमाण सागर महाराज के सानिध्य में दिगंबर जैन डिग्री कॉलेज के मैदान पर वर्ष 2003 में अजितनाथ मंदिर का पंचकल्याणक महोत्सव में हुआ था। जिसमें उस समय भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव रहे व वर्तमान में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज चौहान भी शामिल हुए थे।
वर्ष 1992 में देश के वर्तमान रक्षामंत्री व प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके राजनाथ सिंह भी धर्मनगरी बड़ौत में आचार्य संतमति सागर महाराज के सानिध्य में हुए चतुर्मास में महाराज का आशीर्वाद लेने आए थे। इस दौरान विनोद कुमार जैन एडवोकेट के नेतृत्व में जैन श्रद्धालुओं ने उनका जोरदार स्वागत किया था।
1. उत्तम क्षमा : उत्तम क्षमा की आराधना से पर्युषण पर्व का आरंभ होता है। सहनशीलता का विकास इसका उद्देश्य है। सभी के प्रति क्षमाभाव रखना।
2. उत्तम मार्दव,: चित्त में मृदुता व व्यवहार में नम्रता होना। सभी के प्रति विनयभाव रखना।
3. उत्तम आर्जव : भाव की शुद्धता। जो सोचना सो कहना। जो कहना, वही करना। छल, कपट का त्याग करना। कथनी और करनी में अंतर नहीं करना।
4.उत्तम शौच : मन में किसी भी तरह का लोभ न रखना। आसक्ति घटाना। न्याय नीति पूर्वक कमाना।
5. उत्तम सत्य : सत्य बोलना। हितकारी बोलना। थोड़ा बोलना। प्रिय और अच्छे वचन बोलना।
6. उत्तम संयम : मन, वचन और शरीर को काबू में रखना। संयम का पालन करना। मन तथा इंद्रियों पर काबू रखना।
7. उत्तम तप : मलिन वृत्तियों को दूर करने के लिए तपस्या करना। तप का प्रयोजन मन की शुद्धि है।
8.उत्तम त्याग : सुपात्र को ज्ञान, अभय, आहार और औषधि का दान देना तथा राग-द्वेषादि का त्याग करना।
9. उत्तम आकिंचन : अपरिग्रह को स्वीकार करना।
10. उत्तम ब्रह्मचर्य : सद्गुणों का अभ्यास करना और पवित्र रहना। चिदानंद आत्मा में लीन होना।