चार दिन पूर्व व्हाट्सएप ग्रुप पर मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के खिलाफ आपत्तिजनक फोटो और पोस्ट खाड़ी देश के मोबाइल नंबर से डाली गई थी। साइबर सेल ने जांच के बाद इसका खुलासा किया। लेकिन, परतापुर पुलिस ने कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ता और ग्रुप एडमिन की सहमति लेकर कार्रवाई से किनारा कर लिया।
मामला बृहस्पतिवार को सामने आया था। परतापुर थाना क्षेत्र के इंदिरापुरम निवासी मोहित ने परतापुर थाना पुलिस से शिकायत की थी कि वह जली कोठी निवासी एक उद्यमी के बनाए व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ा है। इसी ग्रुप में शामिल दूसरे समुदाय के व्यक्ति ने बुधवार रात करीब नौ बजे मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी के प्रति आपत्तिजनक फोटो और टिप्पणी की है। आरोप है कि जब उसने ग्रुप में इस तरह की पोस्ट न डालने को कहा तो आरोपी ने आपत्तिजनक चैटिंग करनी शुरू कर दी। इसकी जानकारी मिलने पर हिंदू संगठन के लोगों ने परतापुर थाने जाकर विरोध जताया था। तहरीर देकर आरोपी की गिरफ्तारी की मांग की थी। पुलिस ने मामला साइबर सेल को भेजा था।
11 डिजिट का था वह नंबर
क्राइम ब्रांच के साइबर सेल प्रभारी कर्मवीर सिंह ने बताया कि इस मामले की जांच में शिकायतकर्ता से उसके मोबाइल फोन से पूरी डिटेल और साक्ष्य लिए गए। इंटरनेशनल गेटवे की स्कैनिंग में सामने आया कि जिस नंबर से पोस्ट आई थी, वह 11 डिजिट का था। जांच में ये नंबर खाड़ी देश का निकला। इसका ग्रुप का एडमिन जली कोठी निवासी है। संभव है कि पोस्ट करने वाला व्यक्ति ग्रुप एडमिन का परिचित होगा। जिसने इसको ग्रुप से जोड़ा। पूरी रिपोर्ट परतापुर पुलिस को दे दी गई थी। अब इस केस में थाना स्तर से ही कार्रवाई संभव है।
दोनों पक्ष सहमत इसलिए कार्रवाई नहीं
व्हाट्सएप्स
परतापुर थाने के कार्यवाहक प्रभारी एसएसआई सुरेंद्र भाटी ने बताया कि शिकायतकर्ता और ग्रुप एडमिन दोनो को पूछताछ के लिए बुलाया गया था। ग्रुप एडमिन का कहना था कि ये मामला मेरी जानकारी में नहीं था। उसने ग्रुप से उस नंबर को हटा दिया है। शिकायतकर्ता और ग्रुप एडमिन एक-दूसरे के अच्छे परिचित हैं। मामला खाड़ी देश से जुड़ा था, इसलिए दोनों पक्षों ने सहमति से इस मामले में कोई कार्रवाई न करने का अनुरोध किया था। इस कारण कोई कार्रवाई नहीं की गई।
पुलिस ने क्यों नहीं दिखाई गंभीरता
मामला प्रदेश के मुख्यमंत्री से जुड़ा है। आपत्तिजनक पोस्ट भी दूसरे देश से आई। ऐसे में मामला बेेहद गंभीर था। लेकिन पुलिस ने इसे हल्के में लिया। पुलिस ने ये भी पता लगाने की कोशिश नहीं की कि ग्रुप में आखिर दूसरे देश के व्यक्ति का नंबर कैसे जोड़ा गया। ग्रुप एडमिन को इस व्यक्ति के बारे में पूरी जानकारी होेगी। लेकिन पुलिस ने न तो उसके जरिये पोस्ट करने वाले तक पहुंचने की कोशिश की और न ही उच्चाधिकारियों को इसकी जानकारी दी।
मामला गंभीर है, लेकिन मेरे संज्ञान में नहीं है। परतापुर थाने और साइबर सेल से जानकारी लेकर इस मामले में कार्रवाई की जाएगी।
-आलोक प्रियदर्शी, एसपी सिटी