विक्टोरिया पार्क अग्निकांड में 22 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट फैसला सुना सकती है, लेकिन इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर न्यायिक आयोग पूर्व जस्टिस एसबी सिन्हा की जांच रिपोर्ट सार्वजनिक हो चुकी है। इस रिपोर्ट में आयोजकों को घटना के लिए साठ प्रतिशत और सरकारी तंत्र को चालीस प्रतिशत दोषी माना गया है। इस रिपोर्ट के इस पक्ष को देखें तो पीड़ित पक्ष को न्याय तो मिलने की उम्मीद तेज हुई है। लेकिन दूसरा पहलू ये भी है कि मुआवजे की मांग कर रहे पीड़ितों की उम्मीदें इस रिपोर्ट से कहीं न कहीं टूट सकती है।
पीड़ित पक्ष ने मृतकों के परिजनों के 20-20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। अब तक पीड़ित पक्ष को राज्य सरकार की तरफ से सात-सात लाख रुपये मुआवजा मिल चुका है। ऐसे में 13-13 लाख रुपये अभी मिलने की उम्मीद पीड़ित पक्ष को है, जो सुप्रीम कोर्ट तय करेगा। लेकिन इसमें मुख्य पेच यह फंसा था कि मुआवजा कौन देगा।
आयोजकों ने घटना के लिए पूरी तरह सरकारी तंत्र को जिम्मेदार ठहराते हुए सरकार द्वारा ही मुआवजा देने की बात कही थी। अब सिन्हा आयोग की रिपोर्ट विक्टोरिया पार्क अग्निकांड के लिए साठ प्रतिशत आयोजकों और चालीस प्रतिशत सरकारी तंत्र को जिम्मेदार ठहरा रही है। ऐसे में अगर देखा जाये तो सरकारी तंत्र की तरफ से मुआवजा आठ लाख रुपये बनता है, जिसमें से सात लाख रुपये वह दे चुकी है। मात्र एक -एक लाख रुपया सरकार की तरफ बनता है। जबकि आयोजकों को प्रति मृतक 12 लाख की देनदारी आती है। जो 7.80 करोड़ रुपये बैठता है।
आयोजकों पर नहीं है फूटी कौड़ी
विक्टोरिया पार्क में आयोजित कंज्यूमर मेला के आयोजकों के पास इस समय कुछ नहीं है। केस शुरू होने से पहले ही वह अपनी सभी चल अचल संपत्ति बेच चुके हैं। अब यदि कोर्ट उनकी तरफ देनदारी भी निकालती है तो पीड़ित पक्ष को कुछ नहीं मिलेगा। ऐसे में पीड़ित पक्ष की मुआवजे की उम्मीद एक बार फिर अटकती नजर आ रही है। हालांकि पीड़ित पक्ष इस संबंध में कोर्ट को बता चुका है कि आयोजकों से उन्हें कुछ नहीं मिलने वाला है। लेकिन न्यायिक आयोग की रिपोर्ट ने जो गुण दोष तय किए हैं, उस पर अगर गौर करें तो मुआवजा कहीं न कहीं फिर से फंसता नजर आ रहा है।