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EXCLUSIVE: कच्ची शराब बनाने की फैक्ट्री का भंड़ाफोड़, ऑन डिमांड होती है तैयार

Mon, 06 Mar 2017 01:00 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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मेरठ के खादर में कच्ची शराब बनाता युवक। - फोटो : अमर उजाला
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चुनाव से पहले खादर में कच्ची शराब का जानलेवा कारोबार जोरों पर है। होली के लिए धड़ल्ले से तैयारी की जा रही है। सिस्टम की सुस्ती का फायदा उठाते हुए शराब माफिया सक्रिय हैं। ‘अमर उजाला’ ने कच्ची शराब को लेकर खादर में पड़ताल करते हुए स्टिंग किया, तो इन भट्ठियों का सच उजागर हो गया। 
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ऑन डिमांड होती है तैयार 
खादर में कुछ लोग कच्ची शराब बनाने के पुराने खिलाड़ी हैं। ये लोग मांग के अनुसार फ्लेवर वाली शराब तैयार करते हैं। इनमें सौंफ, इलायची, संतरा, सेब और अंगूर आदि के फ्लेवर शामिल हैं। ऐसी शराब लोग होली या अन्य विशेष अवसरों के लिए तैयार कराते हैं। इसके अलावा रुटीन में भी इस तरह की शराब की सप्लाई होती है। 

यूरिया की मिलावट
कच्ची शराब बनाने वाले पुराना गुड़ या शीरा लेकर उसमें नौसादर और यूरिया मिलाते हैं। इस मिश्रण को लाहन कहा जाता है। इस मिश्रण को कुछ दिन रखकर सड़ाया जाता है और उसके बाद एक ड्रम में पानी के साथ मिलाकर उबाला जाता है। इससे निकलने वाली भाप एक चौड़े ढक्कन से टकराती है। उसके ऊपर ठंडे पानी को रखा जाता है और यह पानी बार-बार बदला जाता है। ऐसे में भाप ठंडी होकर फिर से द्रव में तब्दील होती है। इस द्रव को एक पाइप के जरिये कनस्तर, बाल्टी आदि में इकट्ठा कर लिया जाता है। यही द्रव कच्ची शराब होता है। बाद में फ्लेवर या रंग देने के लिए इनमें खाने वाले रंग और फलों के एसेंस को मिला दिया जाता है। कुछ लोग जूस वाले फलों से भी शराब तैयार करते हैं। ये लोग सड़े-गले फलों में नौसादर और यूरिया मिलाकर उसका लाहन तैयार करते हैं। इसके बाद वही प्रक्रिया जो दूसरे लोग शराब तैयार करने में अपनाते हैं, ये लोग भी करते हैं।  
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अज्ञानता से बनाते हैं जहर

कच्ची शराब तैयार करते लोग
खादर में तैयार होने वाली कच्ची शराब धीरे-धीरे बीमार करती है। इसमें संबंधित व्यक्ति मानसिक और शारीरिक रूप से कमजोर हो जाता है। वह ज्यादा सेवन कर ले, तो जान का खतरा बन जाता है। कुछ लोग इस प्रक्रिया से अलग सीधे शराब तैयार करते हैं। यह जानलेवा होती है। ये लोग शुगर मिलों से निकलने वाले ईथाइल और मिथाइल के टैंकर चालकों से सेटिंग कर लेते हैं। कहीं भी बीच में टैंकरों को रोककर 50 से 100 लीटर ईथाइल या मिथाइल निकाल लेते हैं। टैंकर चालक हों या ये शराब बनाने वाले, इन्हें ईथाइल और मिथाइल का अंतर पता नहीं चलता। ईथाइल शराब बनाने के काम आती है, जबकि मिथाइल जहर होता है। ऐसे में कभी-कभी ये लोग मिथाइल की शराब बनाकर बेच देते हैं और यही शराब मौतों का कारण बनती है।

स्प्रिट भी आती है काम

तैयार किया गया लाहन
जिला उद्योग केंद्र में दर्जनों इकाइयां पेंट बनाने के लिए रजिस्टर्ड हैं। इनमें कुछ इकाइयां सिर्फ कागजों में हैं। इन इकाइयों में नॉन मेडिकल स्प्रिट सप्लाई होती है। इस स्प्रिट को भी कुछ लोग शराब बनाने में प्रयोग करते हैं।

मतदान से पहले चला था अभियान 
विधानसभा चुनाव से पहले पुलिस और आबकारी विभाग ने खादर क्षेत्र में संयुक्त रूप से अभियान चलाया था। सैकड़ों भट्ठियों को तोड़ते हुए हजारों लीटर लाहन नष्ट करने का दावा किया था। एक दर्जन से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार भी किया था। चुनाव बाद पुलिस-प्रशासन ने इस तरफ से आंखें बंद कर लीं। अब होली से पहले शराब की डिमांड को देखते हुए माफिया धड़ल्ले से कच्ची शराब बना रहे हैं।
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सेटिंग का खेल

डीएम बी चंद्रकला
खादर क्षेत्र में कच्ची शराब तैयार करने वालों की पुलिस से सेटिंग उजागर होती रही है। आबकारी विभाग को भी इस सेटिंग के कारण कार्रवाई में दिक्कत आती है। ऐसे में गंगा किनारे ये भट्ठियां फिर से शुरू हो गई हैं। इस बार शराब बनाने वालों ने गंगा के बीच के कई टापू पर भट्ठियां लगाई हैं। इसके अलावा खादर के ऐसे निर्जन किनारों को ठिकाना बनाया है, जहां पहुंचना आसान नहीं है। यहां पर ये लोग आराम से शराब बनाकर स्टॉक कर रहे हैं। 

अवैध शराब के खिलाफ फिर से अभियान चलेगा। आबकारी और पुलिस विभाग की संयुक्त टीमों से छापामारी करायी जायेगी। खादर क्षेत्र में भी अभियान शुरू होगा। क्योंकि यह गंभीर अपराध है, जिससे लोगों के जीवन को खतरा है। - बी. चंद्रकला, डीएम मेरठ
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