हस्तिनापुर में बृहस्पतिवार को शोहदों से परेशान होकर अनुसूचित जाति के एक परिवार ने जहर खा लिया। इसमें महिला की मौत हो गई। पिता व पुत्री की हालत गंभीर बनी हुई है। आरोप है कि परिवार ने थाने से पुलिस अधिकारी तक से सुरक्षा की गुहार लगाई, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। घटना की जानकारी होने पर पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। पुलिस ने 12 घंटे में पांच नामजद आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
मामला हस्तिनापुर थानाक्षेत्र के पल्टूपुरी गांव का है। गांव में अनुसूचित जाति का एक परिवार रहता है। परिवार की बेटी दिल्ली यूनिवर्सिटी से बीसीए और बेटा मवाना स्थित एक कॉलेज से बीबीए की पढ़ाई कर रहा है। बेटी बुधवार शाम दिल्ली से घर आई थी। बेटा सुबह कॉलेज में परीक्षा देने चला गया। तभी दंपती व बेटी ने जहरीला पदार्थ खा लिया। घटना की जानकारी होने पर पड़ोस के लोगों ने दंपती और बेटी को मवाना स्थित एक प्राईवेट अस्पताल में भर्ती कराया। इलाज के दौरान मां की मौत हो गई, जबकि पिता और पुत्री की हालत गंभीर है। सूचना पर एसडीएम मवाना अंकुर श्रीवास्तव, सीओ यूएन मिश्रा, तहसीलदार अशोक कुमार गुप्ता समेत पुलिस फोर्स मौके पर पहुंचे। एसडीएम ने पिता-पुत्री के बयान लेकर आठ लोगों पर केस दर्ज कराया। पीड़ितों ने मोहल्ले के कश्यप बिरादरी के एक परिवार के रवि, गोपाल, आदेश, सोनू, पप्पू, सत्ते, कृष्णपाल और सचिन पर मारपीट व छेड़खानी का आरोप लगाया है।
शिकायत करने पर पुलिस ने नहीं सुनी
पीड़ित पिता-पुत्री ने बताया कि 12 अप्रैल को आरोपियों ने महिला से छेड़छाड़ की। दंपती ने हस्तिनापुर थाने में शिकायत की। लेकिन पुलिस ने मुकदमा दर्ज नहीं किया। 14 अप्रैल को महिला से छेड़छाड़ और मारपीट की। पीड़ितों ने 15 अप्रैल को एसएसपी से शिकायत करने की बात कही। इस पर गुस्साए आरोपियों ने घर में घुसकर बंधक बनाकर सभी को पीटा। लगातार उत्पीड़न और पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई न करने से परिवार टूट गया।
आठ लोगों पर मुकदमा, पांच गिरफ्तार
सीओ मवाना यूएन मिश्रा ने बताया कि पीड़ित परिवार की तहरीर पर हस्तिनापुर थाने में आरोपी रवि, गोपाल, आदेश, सोनू पुत्र पप्पू व पप्पू, सत्ते, कृष्णपाल पुत्र बनारसी और सचिन पुत्र सत्ते के खिलाफ धारा 147, 323, 452, 354, 352, 306 और एससीएसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने सत्ते, आदेश, सचिन, गोपाल और रवि को गिरफ्तार किया है।
जुर्म की इंतहा हो गई... ‘हाकिम’ बने रहे मूकदर्शक
जुर्म की इंतहा हो गई...। हाकिम भी मूकदर्शक बने रहे। इज्जत बचानी मुश्किल हो रही थी। पत्नी के साथ-साथ अब बेटी पर भी शोहदों की नजर थी। बेटी बोलती थी कि पापा आपके बगैर मैं कैसे अकेले दरिंदों से मुकाबला करूंगी। शोहदों के आतंक और पुलिस के कार्रवाई न करने से आहत अनुसूचित जाति के पिता-पुत्री ने इलाज के दौरान अस्पताल में यह दास्तां सुनाई। जिसने भी इस पीड़ित परिवार का हाल जाना, उसकी रूह कांप उठी। वहीं पुलिस यह कहकर पल्ला झाड़ने में लगी रही कि लिखित में कोई शिकायत थाने नहीं पहुंची। पीड़ित का कहना कि पुलिस द्वारा कार्रवाई न करने के बाद उनको कोर्ट में गुहार लगानी पड़ी।
पीड़ित ने बताया कि आरोपी जब चाहे, जहां चाहे मारपीट और छेड़खानी कर देते थे। पत्नी उनके उत्पीड़न से बहुत परेशान थी। विरोध करने पर बेहरमी से पीटते थे। शोहदों से बचाने के लिए बेटी को दिल्ली यूनिवर्सिटी पढ़ने भेज दिया था। उनकी नजर बेटी पर भी थी। पुलिस कार्रवाई कर देती तो यह कदम नहीं उठाना पड़ता।
कुछ नहीं बिगड़ेगा हमारा
थाने में आरोपियों की सेटिंग थी। उनकी कार्रवाई से पहले वह अपनी फर्जी कार्रवाई करने का दबाव बना लेते थे। थाना पुलिस ने कार्रवाई नहीं की तो वह मेरठ में पुलिस अधिकारी के पास पहुंचे थे। पुलिस अधिकारी से मिलने की बात दबंगों को पता चल गई थी। उसके बाद उन्होंने घर में घुसकर पीटा। जाति सूचक शब्दों का इस्तेमाल कर बोले कि तू अब देखना।
रात में बनाया था मौत का प्लान
दबंगों से परेशान होकर परिवार ने रात में ही मौत का प्लान बना लिया था। सुबह बेटा कॉलेज चला जाएगा, उसके बाद जहर खाकर जान दे देंगे। बृहस्पतिवार को बेटे का पेपर था। लोगों का कहना है कि पीड़ित परिवार ने अपने इस प्लान की जानकारी बेटे को नहीं दी। बताया गया कि बेटा बुधवार रात ही मवाना में अपने एक रिश्तेदार के यहां पर आया था। पुलिस इसकी जांच में जुटी है।
पढ़ा लिखा है परिवार, समझता तो
लड़की का पिता बीएससी कृषि की पढ़ाई कर चुका है। उसकी पत्नी भी पढ़ी लिखी थी। बच्चे भी उच्च शिक्षा ले रहे थे। इसकी जलन आसपास के लोगों को थी। बेटा बीबीए व बेटी दिल्ली विवि में बीसीए की पढ़ाई कर रही है। लोगों का कहना कि इस परिवार को ऐसा कदम नहीं उठना नहीं चाहिए था। शिकायत के अन्य रास्ते भी थे।