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नहीं हुआ कोई चमत्कार, लाड़ले का अंतिम संस्कार

Sun, 11 Oct 2015 02:11 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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आखिरकार, सच के सामने अंधविश्वास की चादर टिक नहीं सकी। तीन दिन पूजा-पाठ करने के बाद व्यापारी परिवार ने शनिवार तड़के ही अपने लाड़ले मानिक का सूरजकुंड स्थित बच्चा श्मशान घाट में अंतिम संस्कार कर दिया। परिजन यह नहीं चाहते थे कि सुबह बखेड़ा खड़ा हो या ज्यादा भीड़ जुटे, इसलिए अल सुबह ही शव को श्मशान घाट लेकर चले गए।
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ब्रह्मपुरी थानाक्षेत्र के शिव शक्ति नगर निवासी व्यापारी कपिल मित्तल के इकलौते बेटे मानिक (11 वर्ष) की मंगलवार सुबह डेंगू के चलते मौत हो गई थी। सूरजकुंड स्थित बच्चा श्मशान घाट में मानिक का शव दफनाने का तैयारी चल रही थी, तभी एक कथित ‘बाबा’ ने ढोंग किया कि 72 घंटे बच्चे को घर रखकर पूजा-पाठ करो, वह जिंदा हो जाएगा। परिजन अंधविश्वास में आए और लाड़ले का शव तीन दिन तक घर में रखकर पूजा-पाठ शुरू कर दिया।


72 घंटे की जगह 78 घंटे तक साधना चलती रही। लेकिन, कोई चमत्कार नहीं हुआ। इसके बाद परिजनों ने शनिवार सुबह पांच बजे ही अपने लाड़ले का अंतिम संस्कार कर दिया। हालांकि, शुक्रवार पूरी रात मानिक के घर पर लोगों का तांता लगा हुआ था।
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परिवार पर टूटा गम का पहाड़
कथित ‘बाबा’ के झांसे में आकर परिजनों ने तीन दिन तक जिगर के टुकडे़ का शव घर पर रखकर पूजा-पाठ किया। आंखों में आंसू लिए परिजनों की जुबां से लगातार ईश्वर की आराधना के शब्द फूटते रहे। अंतत: कथित ‘बाबा’ के दावे झूठे साबित हुए तो परिजनों ने भरे दिल से लाड़ले का अंतिम संस्कार कर दिया।
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