सपा में घमासान के बीच अब नेता भी अपनी राह चुनने लगे हैं। सपा के अधिकांश नेताओं ने जहां इस प्रकरण पर दुख जताया तो भविष्य को देखकर कदम उठाने की बात भी कही। खास बात यह है कि सपा से राज्यसभा सदस्य सुरेंद्र नागर और कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर अखिलेश के साथ हैं। शाहिद मंजूर ने कहा कि वह इकबाल महमूद के साथ शनिवार को बैठक में जाएंगे। वहीं, दोनों ओर की बात कहने वाले नेता भी काफी रहे। लेकिन मुलायम खेमे के साथ होने की बात कम ने ही स्वीकारी।
अखिलेश यादव के पार्टी से निकाले जाने की सूचना मिलते ही सपाइयों में हलचल मच गई। सपा नेताओं ने एक दूसरे से संपर्क साधना शुरू कर दिया। मेरठ में सपा नेताओं में कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर ने अपना रुख साफ कर दिया। उन्होंने दावा किया कि अधिकांश विधायक शनिवार को होने वाली बैठक में भाग लेंगे। इसके अलावा पश्चिम के गुर्जरों के बड़े नेता सुरेंद्र नागर ने भी साफ कर दिया कि वह अखिलेश के साथ ही हैं। बीज विकास निगम के उपाध्यक्ष राजपाल सिंह ने भी अखिलेश के समर्थन में ताल ठोक दी। अधिकांश युवा नेताओं ने भी अखिलेश के साथ रहने की बात कही है। पार्टी के कई पदाधिकारियों ने बयान देने से इंकार किया। लेकिन दबी जुबान में स्वीकार किया कि वह मौका देखकर अखिलेश यादव के साथ ही जाएंगे।
डेलीगेट से कराया गया समर्थन
सपा के राष्ट्रीय सम्मेलन में भाग लेने के लिए पात्र डेलीगेट से टीम अखिलेश के लोग अखिलेश के समर्थन में शुक्रवार सुबह से ही हस्ताक्षर करा रहे थे। इसके लिए बाकायदा सभी जिलों के लिए ड्यूटी लगाई गई है। मेरठ में इसके लिए राजपाल कश्यप को जिम्मेदारी दी गई। बताया जा रहा है कि मेरठ के 65 में से अधिकांश डेलीगेट ने अखिलेश यादव के समर्थन की बात कही। बुलंदशहर और गौतमबुद्घ नगर की जिम्मेदारी राज्यसभा सांसद सुरेंद्र नागर के पास थी। यह भी कहा जा रहा हैॅ कि 34 में 29 डेलीगेट ने मुख्यमंत्री के समर्थन में गौतमबुद्घनगर में और 59 में से 50 के आसपास बुलंदशहर में अखिलेश के समर्थन में हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि ये हस्ताक्षर अखिलेश यादव को पार्टी से निकाले जाने से पहले कराए गए हैं। बदली परिस्थितियों में कितने लोग शामिल होंगे, यह देखने वाली बात होगी।
यह असंवैधानिक निर्णय
मुख्यमंत्री को पार्टी से हटाना असंवैधानिक है। अखिलेश यादव ने सिर्फ विकास की बात कही है। अब जब राजनीति में साफ चेहरों को लाने की हिमायत कर रहे हैं तो उन्हें हटाने की साजिश की गई है।- सुरेंद्र नागर, राज्यसभा सदस्य, सपा
अखिलेश में ही दम
प्रदेश भविष्य की ओर देख रहा है। सांप्रदायिक ताकतों को हराने का दम अखिलेश यादव के पास ही है। कैबिनेट का सदस्य होने के नाते मुझे अपने नेता पर विश्वास है। शनिवार सुबह की अखिलेश यादव की बैठक में इकबाल महमूद सहित दूसरे साथियों के साथ शामिल होंगे।- शाहिद मंजूर, कैबिनेट मंत्री
यह समय दुखद
यह समय पार्टी के लिए दुखद है। हर सपाई गम की स्थिति में हैं। हम दुआ कर रहे हैं कि कुछ ऐसा हो कि हमारे दोनों नेता फिर से एक साथ हों। हमें पूरा विश्वास है कि समाजवादी एकजुट होंगे।- गुलाम मोहम्मद, विधायक सिवालखास
खुलेआम अखिलेश के साथ
भविष्य की बागडोर अखिलेश यादव के हाथों होना समय की मांग है। 90 फीसदी कार्यकर्ता अखिलेश के साथ है। हम लोग विकास और नई सोच के साथ खुलेआम अखिलेश यादव के साथ हैं।- राजपाल सिंह, उपाध्यक्ष उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम
युवा अखिलेश के साथ
पार्टी अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव हर सपाई के पिता तुल्य हैं। पहली बार प्रदेश में कोई मुख्यमंत्री विकास के नाम पर चुनाव लड़ने की बात कर रहा है। युवाआें की पूरी टीम अखिलेश यादव के साथ है।- ओमपाल गुर्जर, युवा सपा नेता
... हमारा नेता अखिलेश है
खून का एक-एक कतरा अखिलेश यादव को स्थापित करने में लगा दिया जाएगा। ‘युवाओं का देश है और हमारा नेता अखिलेश है’ के नारे को आगे बढ़ाकर युवा पीढ़ी को अखिलेश यादव के साथ लाया जाएगा।- परविंद्र सिंह ईशु सपा नेता
नेता जी सबके लिए सर्वोपरि
नेताजी ने अपनी मेहनत से पार्टी बनाई है। अखिलेश यादव को खुद ही इस्तीफा दे देना चाहिए था। नेता जी सबके लिए सर्वोपरि हैं। वहीं पार्टी के नेता हैं। जैसा मुलायम सिंह यादव कहेंगे, वैसा ही कहा जाएगा।- डॉ. राजेश कुमार, सदस्य एमडीए बोर्ड
अभी कहने का समय नहीं
अभी कुछ भी कहने का समय नहीं है। सपा नेताओं के लिए यह दुखद समय है। हमारा ध्यान यह है कि पार्टी में अभी भी सब कुछ ठीक हो जाए। ऐेसे में अभी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं।- डॉ. सरोजिनी अग्रवाल, एमएलसी