सरधना से भाजपा विधायक ठा. संगीत सिंह सोम अलीगढ़ में एक फूड प्रोसेसिंग फैक्ट्री में भागीदारी के आरोपों से घिर गए हैं। मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि संगीत सोम मीट का कारोबार करने वाली कंपनी अल दुआ फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड में डायरेक्टर थे।
कंपनी के लिए उन्होंने कोल तहसील के अमरपुर कोंडला में जमीन भी खरीदी थी। कुछ चैनलों पर दिखाई जा रही जमीन की रजिस्ट्री में उन्हें कंपनी का एक डायरेक्टर बताया जा रहा है। साथ ही कहा गया है कि इस जमीन की खरीद में उनके दो और साझीदार भी थे।
यह मामला तब सुर्खियों में आया, जब प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खां ने उन पर स्लाटर हाउस के लिए अनुमति मांगने का आरोप लगाया। उधर, संगीत सोम ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
उधर, कहा जा रहा है कि जमीन खरीद में सोम के साथ खुर्जा के मुईनउद्दीन कुरैशी पुत्र शाहबुउद्दीन और योगेश रावत पुत्र किशन कुमार रावत निवासी अबु फजल रोड, गोल मॉर्केट नई दिल्ली भी थे। जमीन बेचने वाले देवेंद्र पाल सिंह, योगेंद्र पाल सिंह, गजेंद्र पाल सिंह पुत्र महावीर सिंह निवासी अमरपुर कोंडला, कोल तहसील थे।
यह है अलदुआ फूड प्रोसेसिंग फैक्ट्री
कुछ मीडिया रिपोर्टों में अलदुआ फूड प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड की वेबसाइट के हवाले से दावा किया गया है कि यह कंपनी देश-विदेश में हलाल मीट की सप्लाई के लिए जानी जाती है। कंपनी भैंस, भेड़ और बकरे के मीट का निर्यात करती है। कंपनी सऊदी अरब, इराक, लेबनान, सीरिया, सेनेगल, कांगो, अल्जीरिया, जॉर्डन, यूएई, अबुधाबी, अंगोला, सिंगापुर, वियतनाम आदि देशों को मीट निर्यात करती है।
मेरा मीट प्लांट सिद्ध हो जाए तो संन्यास ले लूंगा : सोम
मेरठ। विधायक ठा. संगीत सिंह सोम ने बीफ विवाद में अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कहा कि यदि उनका कोई मीट प्लांट सिद्ध हो जाए तो वह सियासत ही नहीं, सार्वजनिक जीवन से भी संन्यास ले लेंगे। मामले को सपा की बौखलाहट करार देते हुए कहा कि यह प्रकरण लगातार तीन साल से उठ रहा है और खारिज भी हो जाता है। शुक्रवार को कलेक्ट्रेट में भाजपा समर्थित जिला पंचायत प्रत्याशियों के नामांकन कराने आए विधायक सोम ने इस संबंध में सवाल करने पर कहा, ‘मुझे गर्व है कि मैं हिंदू हैं।
हिंदू धर्म के संस्कारों को जानता हूं। मैं तो अंडा तक नहीं खाता, फिर मीट का कारोबार तो दूर की बात है। यह तो सच है कि वर्ष-2009 में मैंने अलीगढ़ में जमीन खरीदी थी, लेकिन उसे तीन माह बाद ही बेच दिया था। इसके दस्तावेज भी मेरे पास हैं।’ उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार बौखलाहट में उनके खिलाफ यह मुद्दा लगातार पिछले तीन साल से लेकर आ रही है और खारिज होने पर चुप बैठ जाती है।