सूरजकुंड संप्रेक्षण गृह में शुक्रवार देर रात मेरठ और बागपत के किशोरों में खूनी संघर्ष हो गया। जिसमें नौ किशोर घायल हो गए। सूचना पर पुलिस और आला अधिकारी आधी रात को तीन बजे संप्रेक्षण गृह पहुंचे। पुलिस और प्रशासनिक अफसरों की बैठक के बाद इन दोनों जिलों के 21 किशोरों (मेरठ के 11 और बागपत के 10) को प्रदेश के 12 संप्रेक्षण गृहों में शिफ्ट कर दिया गया।
मेसेज मिलते ही भिड़ बैठे
संप्रेक्षण गृह जिला जेल के बराबर में शिफ्ट करने को लेकर किशोर लगातार उपद्रव कर रहे थे। शुक्रवार देर रात मेरठ और बागपत के किशोरों ने इस शिफ्टिंग का ठीकरा एक-दूसरे पर फोड़ना शुरू किया और आपस में भिड़ बैठे।
दरअसल पुलिस प्रशासन ने संप्रेक्षण गृह में शुक्रवार को मेसेज भिजवाया था कि मेरठ के 11 किशोर बवाल करने में आगे थे। जो दूरदराज शिफ्ट होंगे। इस पर मेरठ के किशोरों ने कहना शुरू कर दिया कि बवाल में तो बागपत के भी किशोर थे।
अकेले मेरठ के किशोर क्यों जाएं। इस पर दोनों पक्ष आपस में भिड़ बैठे। बखेड़े की आड़ में कहीं किशोर फरार न हो जाएं, पुलिस ने संप्रेक्षण गृह की चौतरफा घेराबंदी कर ली।
किशोरों को शांत करने के बाद अफसरों की बैठक में जब उनकी यह गुटबाजी उजागर हुई तो दोनों जिलों के बवाली किशोरों को गोंडा, बस्ती, ललितपुर, मऊ, गोरखपुर, मुरादाबाद, बरेली, आगरा, शाहजहांपुर, नोएडा, बुलंदशहर, मुजफ्फरनगर जिलों में शिफ्ट करने का निर्णय ले लिया।
पुलिस ने कराया मेडिकल
पुलिस ने शनिवार को नौ किशोरों को सरकारी अस्पताल में भर्ती कराते हुए उनका मेडिकल परीक्षण भी कराया। पुलिस का दावा है कि रिपोर्ट के आधार पर बालिग पाने पर इन्हें जिला जेल में शिफ्ट कराएंगे। इंस्पेक्टर नौचंदी हरशरण शर्मा ने बताया अब संप्रेक्षण गृह में 33 किशोर हैं। जिनमें से कुछ जिला जेल में शिफ्ट होंगे।
गुटबाजी का मिला फायदा
मेरठ और बागपत के किशोरों की गुटबाजी का पुलिस को पूरा फायदा मिला। कभी संप्रेक्षण गृह में घुसने तक से घबराने वाली पुलिस के सामने किशोर का नाम बोलते ही एक-दूसरे गुट के किशोर उसे बाहर खींचकर गाड़ी में बैठाते रहे। यह नजारा देख अफसर भी हैरान थे, लेकिन यह सब पुलिस का मैनेजमेंट था।
लगे आरोप
किशोरों ने आरोप लगाया कि शनिवार तड़के संप्रेक्षण गृह पहुंची पुलिस ने लाठी चलायी, हालांकि पुलिस ने इससे इंकार किया। वहीं, संप्रेक्षण गृह में किशोरों में खूनी संघर्ष और उन्हें शिफ्ट करने को लेकर पुलिस अफसर बयान देने से बचते रहे। अफसरों यही बोले कि छोड़ो भाई, अब यहां से बवाल कटा। प्रशासन ही इस मामले में कुछ कहेगा।