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रिटायर मैनेजर के घर डकैती में दो बदमाश धरे

Fri, 15 Apr 2016 02:19 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/मेरठ
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नौचंदी पुलिस द्वारा पकड़े गए बदमाश। - फोटो : अमर उजाला
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शास्त्रीनगर में एक सप्ताह पूर्व रिटायर बैंक मैनेजर के घर पड़ी डकैती के मामले में पुलिस ने दो बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया। यह गिरोह मेरठ से लेकर लखनऊ तक बीस से अधिक वारदातों को अंजाम दे चुका है। पुलिस ने लूटा हुआ माल बरामद किया है। एसएसपी ने फरार पांच बदमाशों की गिरफ्तारी के लिए दो टीम लगाई हैं।
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एसएसपी दिनेशचंद दूबे ने बृहस्पतिवार को पुलिस लाइन मे प्रेसवार्ता के दौरान घटना का खुलासा किया। बताया कि नौचंदी क्षेत्र के शास्त्रीनगर सेक्टर-9 में छह अप्रैल को रिटायर बैंक मैनेजर ललित मोहन शर्मा और उनकी पत्नी को बंधक बनाकर बदमाशों ने डकैती डाली थी। बृहस्पतिवार को नौचंदी पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम ने मुखबिर की सूचना पर शास्त्रीनगर से दो बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उनके पांच साथी फरार हैं। यह गिरोह लखनऊ, जेपीनगर,
संभल, बिजनौर, गाजियाबाद में चोरी और लूट की घटनाओं को अंजाम दे चुका है।

पकड़े गए बदमाश इमरान उर्फ काना उर्फ मानू पुत्र सलीम निवासी ढबाईनगर थाना नौचंदी, फिरोज पुत्र इरशाद निवासी जीटी कॉलोनी मयूर विहार, फेस 3 दिल्ली हैं। गिरोह का सरगना इमरान है, जो अपने साथियों के साथ रेकी के बाद लूट की घटनाओं को अंजाम देता है। मुख्य आरोपी इमरान उर्फ काना पर चोरी, लूट और डकैती की वारदातों में उत्तर प्रदेश के अलावा दिल्ली, उत्तराखंड व हरियाणा में भी जेल जा चुका है। गिरोह के कई सदस्यों पर भी अलग-अलग राज्यों में एक दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। वहीं एसएसपी ने बताया कि डीआईजी ने नौचंदी पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीम को 12 हजार रुपये नगद पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देने की बात कही है।
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ये कर चुके हैं वारदात 
इमरान ने बताया कि वह चोरी, लूट, डकैती के मामलों में दिल्ली, उत्तराखंड, हरियाणा और यूपी में जेल जा चुका है। 6 अप्रैल को इमरान ने अपने साथी फिरोज, सरफराज, फरमान, सुनील, खुशरुद्दीन और मो. शकील के साथ मिलकर रिटायर बैंक मैनेजर ललित मोहन शर्मा के घर डकैती डाली थी। उनका पता था कि बैंक मैनेजर के घर अधिक संपत्ति है।

लेकिन बैंक मैनेजर अधिकांश पैसा बैंक में रखते थे। घटना में जो स्कॉर्पियो इस्तेमाल की गई है उसे 16 मार्च 2016 को गजरौला में गाजियाबाद-लखनऊ हाईवे से लूटा था। स्कॉर्पियो को लूटने में सरफराज की इनोवा का इस्तेमाल किया गया था। 28 मार्च की रात को स्कॉर्पियो से ही उन्होंने बहजोई जिला संभल से भी तीर्थ यात्रियों को लूटा था। 9 अप्रैल की रात में सिटी कोतवाली बिजनौर के कीरतपुर रोड स्थित इंडियन इंटरप्राइजेज शोरूम का शटर काटकर एलईडी सहित अन्य सामना चोरी किया था। जबकि पांच अप्रैल की रात में थाना अलीगंज लखनऊ में रूची इलेक्ट्रानिक्स का शटर काटकर एलईडी चोरी की थी। इसके अलावा मोदीनगर, गाजियाबाद स्थित शोरूम में चोरी की थी।

य माल किया बरामद
बदमाशों के पास से सफेद रंग की स्कॉर्पियो गाड़ी, 22 एलईडी, 18 बड़ी बैट्री,13 स्टेबलाइजर, दस प्रिंटर, 5 सबमर्सिबल पंप, कंप्यूटर के पार्ट, 8 इंवर्टर, डीवीडी राइटर, स्कैनर, डीवीडी प्लेयर, तीन माइक्रोवेव, ओवन, दो मोबाइल, दो तमंचे, कारतूस, लोहे का कटर आदि सामान बरामद किया गया है।

पांच बदमाश हैं फरार
सरफराज पुत्र सलीम निवासी हुमायूंनगर थाना लिसाड़ीगेट।
फरमान पुत्र हबीब निवासी खौड़ा, जिला गाजियाबाद।
सुनील पुत्र चंद्रपाल निवासी ग्राम भूड़, कोतवाली देहात बुलंदशहर।
खुशरुद्दीन पुत्र सिराजुद्ीन ढबाईनगर थाना नौचंदी।
शकील पुत्र मतीन निवासी ढबाईनगर थाना नौचंदी।

नीली बत्ती लगाकर चलते थे इनोवा में
पकड़े गए बदमाशों में इमरान अंगूठा छाप है। जबकि दिल्ली निवासी फिरोज पांचवी पास है। सरफराज की इनोवा में वह सवार होकर चलते थे। रात में चेकिंग के दौरान पुलिस न पकड़े इसके लिए गाड़ी पर नीली बत्ती लगाते थे। लखनऊ हाईवे पर वह फर्जी एआरटीओ बनकर चलते थे। गाजियाबाद-लखनऊ हाईवे के अलावा वह आसपास के जिलों में रात में या तो वाहनों को लूटते थे या फिर शहरों में शोरूमों में चोरी करते थे। जिस स्कॉर्पियो से शास्त्रीनगर में डकैती डाली थी उस पर सपा का झंडा लगाते थे। एक शहर में घटना को अंजाम देने के बाद फिर दूसरे करते थे

स्कूल में रखते थे लूट का सामान
इंस्पेक्टर नौचंदी हरशरण शर्मा ने बताया कि बदमाश लूट का सामान शास्त्रीनगर स्थित एक स्कूल के भवन में रखते थे। स्कूल मालिक से यह कहकर किराए पर भवन ले रखा था कि वह कंपनी में जॉब करते हैं। पुराना या कम चला हुआ सामान वह वापस कंपनियों को बेचते हैं।

भागने की थी प्लानिंग
रिटायर बैंक मैनेजर के घर डकैती के बाद जब बदमाशों को पता चला कि वे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो चुके हैं तो उन्होंने उत्तराखंड भागने की प्लानिंग बनाई थी। जब वह स्कूल में सामान रखकर निकले तो पुलिस को स्कॉर्पियो पर शक हो गया था, जिस पर उन्होंने फर्जी नंबर डाल रखा था।
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