किराना व्यापारी से पांच लाख रुपये की रंगदारी मांगने के मामले का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। डालमपुर गांव निवासी बीएसएफ के बर्खास्त सिपाही को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। आरोपी कुख्यात योगेश भदौड़ा और भरतू नाई के नाम पर क्षेत्र में चौथ वसूल रहा था। रोहटा में किराना व्यापारी से रंगदारी मांगते ही वह पुलिस जांच के शिकंजे में वह फंस गया।
मुख्य बाजार में मेरठ के कमल गुप्ता की किराना की दुकान है। पांच दिन पहले कमल को फोन कर पांच लाख की रंगदारी मांगी गई थी। व्यापारी की शिकायत पर पुलिस ने जांच की। डालमपुर गांव के नीटू कुमार को गिरफ्तार कर पुलिस और एसओजी ने लंबी पूछताछ करते हुए जेल भेज दिया।
एसओ सतेंद्र यादव ने बताया कि नीटू का किसी गैंग से कोई कनेक्शन नहीं मिला है, बल्कि वह योगेश भदौड़ा और भरतू नाई के नाम पर कई बार वसूली कर चुका है। चौंकाने वाली बात यह है कि नीटू ने योगेश भदौड़ा और भरतू नाई को कभी नहीं देखा। पुलिस का दावा है कि दोनों कुख्यात भी उसे नहीं जानते। भदौड़ा के नाम से वह क्षेत्र के व्यापारियों से कई लाख रुपये वसूल कर चुका है। जबकि दोनो ही गिरोह के बारे में उसे कोई जानकारी नहीं है। सर्विलांस के आधार पर मामले का खुलासा हुआ।
बीएसएफ से बर्खास्त
डालमपुर का नीटू बीएसएफ में नौकरी करता था, लेकिन गलत हरकतों के कारण उसे बर्खास्त कर दिया गया। गांव लौटने के बाद भी वह अपनी आदतों से बाज नहीं आया। लंबे समय से वह कुख्यात बदमाशों के नाम पर लोगों को डराकर चौथ वसूली कर रहा था।
अखबारों से लेता था जानकारी
समाचारपत्रों में छपी खबरों में वह क्षेत्र के गैंग की जानकारियां लेता था। रंगदारी मांगने के वक्त फिर इन्हीं जानकारियों का इस्तेमाल करता था। पुलिस का कहना है कि गैंग के विषय में वह कुछ भी नहीं बता सका।