सपा नेताओं ने शुक्रवार को पुलिस ऑफिस में जमकर हंगामा किया। आरोप लगाया कि अवैध बूचड़खानों को बंद कराने की आड़ में बेकसूर लोगों का उत्पीड़न किया जा रहा है। इस दौरान सपाइयों ने पुलिस अफसरों पर भाजपा सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया तो उनकी एसएसपी से तीखी नोकझोंक हो गई। सपा नेताओं ने पुलिस ऑफिस में ही मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की।
शहर विधायक रफीक अंसारी के नेतृत्व में सपा नेता शुक्रवार दोपहर एसएसपी ऑफिस पहुंचे। पहले ऑफिस में जबरन घुसने के प्रयास पर पुलिसकर्मियों ने रोका तो तीखी बहस हो गई। किसी तरह अंदर पहुंचे सपा नेताओं ने एसएसपी से आरोप लगाते हुए कहा कि अवैध बूचड़खानों को बंद कराने की आड़ में भाजपा, धार्मिक और सामाजिक संगठनों के कुछ लोगों द्वारा एक वर्ग विशेष के लोगों को डरा धमकाया जा रहा है। बच्चा पार्क और सूरजकुंड पार्क पर दूसरे समुदाय की महिलाओं को पीटा गया और पुलिस तमाशबीन बनी रही।
यह भी आरोप लगाया कि सिवालखास और जानी क्षेत्र में दूसरे समुदाय के विवाह समारोह के लिए मीट रुकवा दिया गया, जबकि शादियों में मीट का इस्तेमाल होता है। समाज के पशुपालकों से पशु भी लूटे जा रहे हैं। एक सप्ताह में कानून व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतर चुकी है। चेतावनी दी कि अगर उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो सपाई सड़कों पर उतरकर विरोध करेंगे। इस दौरान पूर्व विधायक गुलाम मोहम्मद, जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह, महानगर अध्यक्ष अब्दुल अलीम, चौ. राजपाल सिंह, चैतन्य देव स्वामी, इसरार सैफी, कपिल राज शर्मा, ठा. हरि सिंह आदि मौजूद रहे।
ऊंची आवाज में बात न करें
एसएसपी जे. रविंद्र गौड़ ने सपाइयों को समझाने की कोशिश की तो वे हंगामा करने लगे। इस पर एसएसपी ने कहा कि ऊंची आवाज में किसी को बात करने की इजाजत नहीं है। पुलिस निष्पक्ष कार्रवाई कर रही है। प्रदेश सरकार सभी के लिए बराबर हैं। यदि कोई भी कानून हाथ में लेगा तो जांच कराकर उससे सख्ती से निपटा जाएगा।
मैं जयवीर हूं...
पुलिस ऑफिस में घुसने के दौरान एक सिपाही ने रोका तो जयवीर सिंह ने सपा जिलाध्यक्ष होने का परिचय दिया। इस पर सिपाही बोला कि मैं नहीं जानता। आदेश सभी के लिए बराबर है। काफी बहस के बाद पुलिस अफसरों ने उन्हें अंदर बुलवाया।
जुमे की नमाज में उठी मांग
जुमे की नमाज के दौरान शहर काजी जैनुल साजिद्दीन ने कहा कि संविधान में हर नागरिक को अपनी मर्जी से जायज कारोबार का हक है। आरोप लगाया कि मीट कारोबार के लाइसेंसधारी लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा रही है। इससे बेरोजगारी बढ़ रही है। सरकार को चाहिए कि लाइसेंसधारी कारोबारियों के खिलाफ कोई कार्रवाई न की जाए। शहर की आपूर्ति के लिए सरकारी कमेला खोला जाए। मीट विक्रेताओं के नए लाइसेंस बनाए जाएं। क्योंकि मुस्लिम शादियों में मीट का इस्तेमाल किया जाता है। मीट बेचने पर पाबंदी न लगाई जाए। अगर मीट कारोबारियों का उत्पीड़न होता है तो वह हक के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। आह्वान किया कि वह लाइसेंस के नियमों को ध्यान में रखकर ही कार्य करें। गो हत्या कतई जायज नहीं है। वरिष्ठ अधिवक्ता इस्लाम मलिक ने आरोप लगाया कि मीट कारोबार सत्ता के दबाव में जानबूझकर बंद कराया जा रहा है। जिससे सैकड़ों परिवार के लोग बेघर होने की कगार पर हैं। उन्होंने कहा कि यह समस्या केवल एक वर्ग की नहीं है, इससे किसान और चमड़े का कारोबार करने वाले भी प्रभावित होंगे।