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पीएफआई ने बैंक खातों में पैसा भेजकर कराई थी हिंसा, मारे गए थे छह लोग, ऐसे बनाया था पूरा प्लान

Thu, 30 Jan 2020 03:41 AM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
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मेरठ उपद्रव का फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में हिंसा कराने के लिए केरल के चरमपंथी इस्लामी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) ने मेरठ में 12 लोगों के बैंक खातों में रकम जमा कराई थी। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के खुलासे के बाद पुलिस अधिकारियों ने गहन जांच शुरू कर दी है। जिन-जिन लोगों के खातों में रकम आई है, उनको नोटिस जारी कर जवाब मांगा जा रहा है। पुलिस के अनुसार नोटिस का जवाब मिलने के बाद कार्रवाई होगी।
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मेरठ उपद्रव की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
20 दिसंबर 2019 को मेरठ में हुई हिंसा में छह लोगों की मौत हुई थी। पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों पर उपद्रवियों ने पथराव करने के साथ गोलियां चलाई थी। इस दिन जुमे की नमाज के बाद मेरठ सहित कई शहरों में एक साथ हिंसा हुई थी। इसको लेकर सुरक्षा एजेंसियों ने जांच पड़ताल की। लखनऊ में हुई प्रेसवार्ता में खुलासा हुआ था कि हिंसा कराने के पीछे पीएफआई का हाथ था। मेरठ में भी इस संगठन के चार लोगों को पुलिस जेल भेज चुकी है। सोमवार को ईडी ने खुलासा किया था कि पीएफआई ने हिंसा कराने के लिए लोगों के बैंक खातों में फंडिंग की थी, जिसके बाद जुमे की नमाज के बाद मेरठ समेत कई शहरों में एक साथ हिंसा हुई।
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पथराव करते उपद्रवी - फोटो : अमर उजाला
मेरठ की हिंसा से जुड़े मामलों में 18 मुकदमे दर्ज किए गए थे, जिनकी विवेचना की निगरानी आईजी रेंज मेरठ प्रवीण कुमार कर रहे हैं। पुलिस की जांच का फोकस था कि पीएफआई ने किस किस के खाते में रकम जमा कराई थी। पैसा लेकर हिंसा करने वालों ने क्या रणनीति बनाई और कहां-कहां हिंसा में उनका हाथ है, इसकी गंभीरता से जांच चल रही है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक मेरठ में 12 लोगों के खातों में पीएफआई ने हिंसा कराने के लिए पैसा डाला। यह जानकारी पुलिस ने बैंकों खातों से निकाल ली है। जिनके खातों में रकम आई, पुलिस ने उनको नोटिस भेज दिया है।

यह भी पढ़ें: ऐसे खुली मेरठ पुलिस की पोल, किरकिरी होने पर एडीजी नाराज, अफसरों को दिए सख्त निर्देश

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पथराव करते उपद्रवी - फोटो : अमर उजाला
ईडी के बाद जागी पुलिस
लोगों को भड़काने और हिंसा फैलाने का काम पीएफआई ने किया। ईडी के खुलासे के बाद पुलिस की नींद टूटी। हिंसा में मेरठ में सबसे ज्यादा छह लोगों की मौत हुई थी, जिसको लेकर सरकार ने भी गंभीरता दिखाई। पुलिस का कहना है कि शहर के जिम्मेदार लोगों के साथ बैठक में सामने आया कि सीएए के विरोध में हिंसा कराने के पीछे गहरी साजिश रही। मेरठ में दिल्ली से कुछ युवक हिंसा कराने के लिए आए थे। गोलियां बरसाने वालों ने भी इसका खुलासा किया था।
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उपद्रवियों ने नकाब बांधकर खूब बरसाईं थी गोलियां - फोटो : अमर उजाला
अयोध्या फैसले के बाद प्लानिंग 
पुलिस का दावा है कि नौ नवंबर को अयोध्या पर आए फैसले के बाद पीएफआई सक्रिय हुआ था। लिसाड़ीगेट, ब्रह्मपुरी, कोतवाली समेत मुस्लिम बहुल इलाकों में पीएफआई से जुड़े लोग मीटिंग करने में लगे थे। पीएफआई ने मेरठ के शास्त्रीनगर इलाके में ऑफिस खोलकर पूरी रणनीति तैयार की। सीएए लागू होने के बाद पीएफआई ने 20 दिसंबर 2019 को जुमे की नमाज के बाद हिंसा कराने का प्लान बनाया था।
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प्रवीण कुमार आईजी रेंज मेरठ - फोटो : अमर उजाला
दोषी बच नहीं पाएंगे
सीएए के विरोध में हिंसा कराने के पीछे पीएफआई की गहरी साजिश थी। मेरठ में दर्ज 18 मुकदमों की विवेचना पर पूरी निगरानी है। पीएफआई द्वारा लोगों के बैंक खातों में रकम जमा करने जांच चल रही है। जो भी दोषी हैं वह बच नहीं पाएंगे। - प्रवीण कुमार, आईजी रेंज मेरठ

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