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रोहटा पंचायत में पुलिस बोली पचास हजार के ईनामी मोनू को पकड़वाओ

Wed, 28 Sep 2016 04:17 PM IST
अमर उजाला ब्यूरों
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फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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 50 हजार के इनामी मोनू जाट को पकड़ना पुलिस के लिए चुनौती बन गया है। मंगलवार को पुलिस ने रोहटा गांव में पंचायत बुलाई। जिसमें कहा कि कुख्यात मोनू को पकड़वाने में ग्रामीण उनकी पूरी मदद करें। जिस पर ग्रामीणों ने पुलिस से कहा कि तुम हथियारों से लैस हो और हम तो निहत्थे है। तुम्हारी भला हम क्या मदद करेंगे। अगर मोनू का कोई पता लगेगा तो वह पुलिस को जरूर बतायेंगे।
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रोहटा गांव में आतंक व खौफ का दूसरा नाम बन चुके मोनू जाट की गिरफ्तारी मेरठ व बागपत जनपद की पुलिस के लिए प्राथमिकता बन चुकी है। बीस दिनों से 250 पुलिसकर्मियों की कई टीमें मोनू की तलाश में लगी हैं। काफी प्रयासों के बावजूद भी पुलिस उसके उसके बारे में एक सुराग तक नहीं ढूंढ पायी है। थक हार कर पुलिस ने मंगलवार को शिव मंदिर में पंचायत बुलाई।
पंचायत में पहुंचे सीओ सरधना बृजेश कुमार और एसओ रोहटा सुरेंद्र भाटी ने ग्रामीणों को संबोधित करते हुए कहा कि कुछ ग्रामीण अब भी मोनू की मदद कर रहे है। पुलिस ऐसे लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेगी। सीओ ने कहा कि जब पुलिस मोनू के मददगारों पर कार्रवाई करती है तो ग्रामीण थाने पर पुलिस के खिलाफ हंगामा करते हैं। हंगामा करने वालों पर केस दर्ज किया करेंगे।
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एसओ रोहटा ने ग्रामीणों से मोनू को पकड़ने में मदद करने की बात कही। जिस पर ग्रामीणों ने कहा कि मोनू की मदद करने वालों की जानकारी पुलिस को है तो वह उनको गिरफ्तार करके जेल क्यों नहीं भेजती। हम मदद करने से पीछे नहीं हटेंगे।

तुम चले जाओगे, हमें तो रहना है
ग्रामीणों का कहना है कि अगर कुख्यात मोनू की जानकारी पुलिस को बता दें तो क्या यकीन कि पुलिस उसे पकड़े भी या नहीं। पुलिस अगर मोनू को मारे तो हम उसकी तमाम जानकारी बताने को तैयार हैं। यह सुनते ही पुलिसकर्मियों की सांसें रुक गई। जिस पर पुलिस ने उनको भरोसा दिया कि वह उनके साथ है। अगर ट्रांसफर भी हो जाएगा तो भी मदद करेंगे।

पंचायत में बहुत कम लोग आए
मोनू के खिलाफ होने वाली पंचायत में बहुत कम लोग दिखाए दिए। मंगलवार सुबह पुलिस प्रशासन द्वारा गांव में मुनादी कराकर ग्रामीणों को दोपहर बारह बजे गांव में होने वाली पंचायत की जानकारी दी थी। लेकिन ग्रामीणों पर मोनू का खौफ इस कदर हावी है कि बीस हजार से भी ज्यादा आबादी वाले गांव में बमुश्किल सौ ग्रामीण ही बैठक मेेेें जुट सके। मीडियाकर्मी को पंचायत की कवरेज करने के लिए ग्रामीणों ने अपनी जान का वास्ता देकर रोका।
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