परीक्षितगढ़-मवाना मार्ग पर 19 मई को दिनदहाड़े हुई सोना गांव के प्रधान सत्यवीर सिंह की पुत्रवधू रजनी की सनसनीखेज हत्या का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। हत्या रजनी के पति बिजेंद्र ने अपने दोस्तों को 50 हजार रुपये की सुपारी देकर करायी थी। पति के दूसरी महिला से संबंध थे, जिसमें रजनी अड़चन बनी थी। हत्यारोपी पति जहां एमबीए का तो उसके साथी पॉलीटेक्निक के छात्र हैं। पुलिस ने तीन हत्यारोपियों को गिरफ्तार करते हुए आरोपी पति को भी अस्पताल से कस्टडी में ले लिया है।
एसपी देहात डॉ. प्रवीन रंजन के अनुसार हत्या में आशीष पुत्र महकार, अजय पुत्र ध्यान सिंह निवासी लालपुर भावनपुर और नितिन नाई पुत्र लीलू नाई निवासी अमरसिंहपुर परीक्षितगढ़ को गिरफ्तार किया गया है।
आरोपियों ने बताया कि बिजेंद्र के गांव की एक युवती से संबंध हैं। जिसका रजनी विरोध करती थी। बिजेंद्र ने 50 हजार रुपये की सुपारी देकर अपनी पत्नी की हत्या कराई। वहीं, वारदात को लूट के विरोध में हत्या दर्शाने के लिये खुद को भी पैर में दो गोलियां लगवाई। इस मामले में सलीम मलिक निवासी अगवानपुर भी शामिल है, जिसकी तलाश है।
मर्डर में पढ़े लिखो का मैनेजमेंट
एसपी के अनुसार हत्यारोपी पति बिजेंद्र एमबीए का छात्र है। अपनी मोहब्बत के बीच में अड़चन बन रही पत्नी को रास्ते से हटाने के लिये उसने इसे लूट विद मर्डर ठहराने का पूरा मैनेजमेंट किया था। शातिर बिजेंद्र ने अपने बचपन के दोस्त आशीष को फोन कर पत्नी की हत्या का प्लान बनाया। आशीष और अजय पॉलीटेक्निक छात्र हैं।
यूं खुला यह केस
मौका-ए-वारदात पर ही एसपी देहात ने निरीक्षण के बाद घटना के कारणों को प्रथम दृष्टया संदिग्ध ठहरा दिया था। मौके पर खून नहीं मिला था तो बदमाशों द्वारा 25 हजार रुपये लूटकर ले जाने और रजनी के शरीर पर जेवर छोड़कर जाने से शक गहराया था।
वहीं, वारदात में रजनी के सीने से तमंचा सटाकर गोली मारना और बिजेंद्र के पैर में पिस्टल से गोली लगने को लेकर भी पूरा मामला संदिग्ध बन गया था। एसपी देहात के अनुसार वारदात के बाद जब बिजेंद्र से पूछताछ शुरू हुई तो उसके अलग-अलग बयान सामने आए।
उसके मोबाइल फोन की जांच में एक नंबर मिला, जो आशीष का था। पुलिस ने आशीष को हिरासत में लेकर कड़ाई से पूछताछ की तो केस खुलता चला गया।
घर पर प्लानिंग, पत्नी से मिलवाया
एसपी देहात के अनुसार रजनी की हत्या की योजना दो सप्ताह बिजेंद्र के घर पर ही बनी थी। बिजेंद्र ने आशीष और अजय को अपने घर बुलाकर रजनी से मिलवाया था। प्लानिंग के तहत रजनी को सीने में गोली मारकर लूट की वारदात दर्शाना है।
घटनास्थल, वारदात कैसे करनी और भागने की कहानी पहले से तय थी। 15 हजार रुपये तभी दिए गए थे, बाकी पैसा वारदात के 20 दिन बाद देना तय हुआ था। दो तमंचे ओर कारतूस भी बिजेंद्र ने आरोपियों को दिए थे।
आशीष और अजय ने जब सुपारी की रकम कम बतायी तो बिजेंद्र ने आरोपियों से कहा कि रजनी कुछ जेवरात पहने होगी। हत्या के बाद तुम लोग उसके जेवरात भी ले जाना। ताकि यह लूट ही लगे।
लेकिन हत्या के बाद आरोपी घबरा गया और रजनी के शरीर से जेवरात ले जाना भूल गया। बिजेंद्र ने रजनी के शरीर पर जेवरात देखे तो उसने 25 हजार रुपये लुटने की कहनी रची थी। जिस पर पुलिस को शक हुआ था कि बदमाश अगर लूट के इरादे से रजनी का मर्डर करते तो जेवरात क्यों छोड़ते।
आशीष ने मारी रजनी को गोली
आशीष ने रजनी को एक गोली पेट में दूसरी सीने से सटाकर मारी थी। जिसमें रजनी की एक साल बेटी का फ्राक भी जल गया था। एक गोली आरपार हो गई थी, जबकि दूसरी गोली शरीर में थी। वहीं, अजय ने बिजेंद्र के पैर में गोली मारी थी।
मासूम का क्या कसूर
मां दुनिया से चली गई और पिता उसकी सजा में जेल जाएगा। ऐसे में एक साल की मासूम प्रिंसी का क्या कसूर है। अवैध संबंधों के चलते हंसता-खेलता परिवार उजड़ गया। पुलिस का कहना है जांच में अगर वह युवती शामिल पायी गई तो उसे षड्यंत्र रचने का आरोपी बनाया जाएगा।