अपहृत छात्रा की नृशंस हत्या कर दी गई। उसका शव सोमवार दोपहर बौंद्रा इलाके में गंग नहर से बरामद हुआ। आरोपियों ने शनिवार सुबह छात्रा का उसकी मां और छोटी बहन को बंधक बनाकर अपहरण किया था। लेकिन पुलिस आरोपियों को बेकसूर और मामला संदिग्ध बताकर टालने में लगी रही। अब पुलिस को आशंका है कि गैंगरेप के बाद छात्रा की हत्या की गई है।
शव मिलने के बाद परिजनों का पुलिस के खिलाफ गुस्सा फूट पड़ा। पीड़ित परिवार का कहना है कि छात्रा की हत्या पुलिस की लापरवाही के चलते हुई। मामला तूल पकड़ते देख अपनी नाकामी छिपाने के लिए पुलिस ने आनन फानन में नामजद चार आरोपियों को जेल भेज दिया।
मामला किठौर थानाक्षेत्र के एक गांव का है। शनिवार सुबह एक महिला अपनी दो बेटियों के साथ नहर के पास खेत में पशुओं का चारा लेने गई थी। इस दौरान आधा दर्जन लोग मां-बेेटी को बुग्गी से बांधकर दूसरी बेटी को अगवा करके ले गए थे। मां-बेटी ने किसी तरह बंधनमुक्त होकर गांव में पहुंचकर शोर मचाया।
जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पीड़ित परिवार की शिकायत पर पिंटू, पप्पी, बिजेंद्र उर्फ बॉबी पुत्र ओमपाल, सतेंद्र उर्फ जॉनी पुत्र समरपाल और लीलू पुत्र कृपाल समेत सात युवकों के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
पुलिस नामजद आरोपियों को बेकसूर बताने में लगी थी। जबकि पीड़ित परिवार चिल्ला चिल्लाकर कहता रहा कि पुलिस ने जल्द कार्रवाई नहीं की तो आरोपी उसकी बेटी की हत्या कर देंगे। इसके बावजूद भी पुलिस की नींद नहीं टूटी। नतीजा यह हुआ कि सोमवार सुबह छात्रा की लाश नहर में लोगों ने उतराते देखी।
ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस वहां पहुंची और शव को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। उधर, छात्रा का शव मिलने का पता परिजनों को लगा तो कोहराम मच गया। परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस के खिलाफ जमकर हंगामा किया। तब जाकर पुलिस ने आरोपियों पिंटू, बिजेंद्र, सतेंद्र और लीलू को पकड़कर जेल भेजा।
तेजाब से जलाया गया शरीर
ग्रामीणों ने बताया कि छात्रा के मुंह में चुनरी ठूंसी हुई थी। उसके शरीर पर छाले पड़े थे। अंदेशा लगाया गया कि हत्या के बाद छात्रा के शरीर पर तेजाब डाला गया होगा। आरोपियों ने छात्रा के शरीर पर पत्थर बांधकर उसे नहर में फेंका, ताकि उसका शव पानी के बहाव के साथ ऊपर न आए। पुलिस ने छात्रा से गैंगरेप होना बताया है।
फांसी की सजा मिले आरोपियों को
छात्रा का शव देकर मां और छोटी बहन बेहोश हो गई। पीड़ित परिवार ने मांग की कि आरोपियों को फांसी की सजा होनी चाहिए, तब ही छात्रा की आत्मा को शांति मिलेगी। यह किशोरी बारहवीं की छात्रा थी। ग्रामीणों ने बताया कि नामजद आरोपियों का पीड़ित परिवार से पुराना विवाद चल रहा था।