स्वास्थ्य विभाग में गड़बड़झाला एनआरएचएम घोटाले से भी कहीं ज्यादा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि कागजों में टीकाकरण के लिए 20 गाड़ियां भेजी गई, जबकि फील्ड में 8-10 गाड़ियां ही गईं। जांच में खुलासा हो रहा है कि बाकी गाड़ियों के दिए नंबर स्कूटर, बाइक या बस के हैं। वित्तीय वर्ष 2014-15, 2015-16 के सीएमओ दफ्तर में विशेष ऑडिट में सबसे बड़ी धांधली टीकाकरण के नाम पर अभी तक पकड़ में आई है। ऐसे में पूर्व सीएमओ डॉ. अमीर सिंह व डॉ. रमेश चंद्रा की मुश्किलें बढ़ रही हैं, जिनके खिलाफ पहले ही शासन कानूनी कार्रवाई की संस्तुति कर चुका है।
एनएचएम के तत्कालीन निदेशक अमित घोष के निर्देश पर बीते साल भी ऑडिट टीम आई थी। लेकिन विभाग ने काफी रिकॉर्ड नहीं दिया था। इनमें वित्तीय वर्ष 2015-16 में डॉ. रमेश चंद्रा सीएमओ पर 75 लाख रुपये के घोटाले की रिपोर्ट ऑडिट टीम ने शासन को दी थी। वित्तीय वर्ष 2014-15 में भी सवा करोड़ से ऊपर का घोटाला हुआ था। लेकिन सारा रिकार्ड खपा दिया गया था। जिसकी अब नये सिरे से जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार धांधली का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि टीकाकरण में लगे वाहनों के नंबर भी रिकॉर्ड के अंदर फर्जी पाये जा रहे हैं। जिन्हें फोर व्हीलर दिखाया गया है वो टू व्हीलर या आटो आदि के नंबर हैं।