सलोनी ने बनाई नजदीकी
नीलांजना गाजियाबाद में किराये के मकान रहती थी। वहीं पर सलोनी से उसकी दोस्ती हुई। सलोनी राजेश से भी परिचित थी। राजेश को ठिकाने लगाने के लिए नीलांजना ने जानबूझकर सलोनी को पति के नजदीक भेजा। 20 दिन से राजेश और सलोनी की लंबी लंबी बातें होती थीं। सलोनी ने 25 नवंबर को राजेश को कॉल की। उसने डिफेंस कॉलोनी से राजेश को हापुड़ अड्डे चौराहे पर बुला लिया। जहां से राजेश की कार में सलोनी बैठी और फिर दोनों खुर्जा के लिए निकल पड़े।
राशिद व साबिर से कराया कत्ल
तीन घंटे तक राजेश और सलोनी कार में घूमते रहे। दोनों खुर्जा पहुंचे, जहां पर सलोनी ने राशिद से राजेश की मुलाकात कराई। उसके बाद तीनों खुर्जा देहात में क्रियावली गांव के जंगल पहुंचे। अंधेरा हो चुका था, तभी राशिद ने कार रुकवाकर राजेश को नीचे उतारा। प्लानिंग के तहत मौके पर साबिर भी पहुंच गया। तभी राशिद ने राजेश की गर्दन पर धारदार हथियार से ताबड़तोड़ वार कर दिए। जंगल में शव को छोड़कर राशिद और सलोनी मेरठ आ गए। बिजली बंबा बाईपास पुलिस चौकी के पास राजेश की कार छोड़ दी।
25 लाख में तय हुई थी सुपारी
आरोपी राशिद ने बताया है कि सलोनी ने हत्या कराने की सुपारी 25 लाख रुपये तय की थी। नीलांजना इतना पैसा एक साथ नहीं दे सकती, इसे लेकर एक माह से बात चल रही थी। नीलांजना ने दो-तीन लाख के जेवरात बेचकर एडवांस देने को कहा। बाकी पैसा राजेश की हत्या के दो महीने बाद देना तय किया। नीलांजना कह रही थी कि डिफेंस कॉलोनी वाला मकान बेचकर पैसा दूंगी। इस मकान की कीमत चार करोड़ है, इसको लेकर नीलांजना और राजेश अहलूवालिया में कई बार मारपीट तक हुई।
पहले पति का हनीट्रैप, फिर करा दी हत्या
राजेश डिफेंस कॉलोनी बी-32 में एक साल से अकेले रहते थे। परिवार में विवाद के चलते पत्नी नीलांजना, बेटा सिद्धार्थ व बेटी वैशाली गाजियाबाद में अलग अलग रहते हैं। नीलांजना ने पति का हनीट्रैप कराया और फिर हत्या कर दी। उसका मकसद था कि लोग राजेश का बदनुमा दाग मानकर हत्या होना मान लेंगे।
राजेश की उम्र 60 साल थी। नीलांजना की सहेली की उम्र 40 साल है। राजेश को मरवाने के लिए पत्नी ने ही साजिश रची। राजेश की हत्या हो जाए और करोड़ों की प्रापर्टी बच्चों पर चली जाए। इसको देखते नीलांजना ने सलोनी के जरिये दांव खेला। पत्नी ने एक नया मोबाइल खरीदा और सलोनी को दिया। सलोनी को एफबी व व्हाट्सएप चलाना सिखाया। सलोनी की सोशल साइट के जरिये राजेश से मुलाकात कराई। राजेश सलोनी को पहले से जानता था, लेकिन ज्यादा बात कभी नहीं हुई। 20 दिन तक सलोनी और राजेश फोन पर लंबी बात करते रहे। व्हाट्सएप पर चैटिंग की जाती थी। नीलांजना रोज चैट देखती और रिकार्डिंग सुनती थी। सलोनी ने घूमने की बात कहकर राजेश को बुलाया और फिर खुर्जा ले जाकर उसकी हत्या कर दी।
यह था पूरा मामला
राजेश अहलूवालिया 25 नवंबर को लापता हुए थे। 30 नवंबर को राजेश के बेटे सिद्धार्थ ने गंगानगर थाने में अपहरण का केस दर्ज कराया। राजेश की कार लावारिस हालत में बिजली बंबा बाईपास स्थित पुलिस चौकी के पास मिली थी। जहां पर एक सीसीटीवी कैमरा लगा था। फुटेज में कार से एक महिला और एक युवक को उतरते देखा गया था। पुलिस ने कॉल डिटेल निकाली, जिसमें सलोनी का एक नंबर आया। सलोनी व नीलांजना से पूछताछ चल रही थी। उनकी निशानदेही पर राशिद को गिरफ्तार किया गया। उसके बाद पता चला कि खुर्जा में अपहरण वाले दिन ही उसकी हत्या कर दी गई थी।
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