कम है मेरठ का लिंगानुपात : प्रदेश का लिंगानुपात एक हजार पुरुषों पर 903 है, जबकि मेरठ का यह अनुपात 885 है। इसे सुधारने की शायद गंभीरता से कोशिश नहीं की जा रही है। यही वजह है कि करीब डेढ़ साल में मुखबिर योजना पूरी तरह से सक्रिय नहीं हो पाई है। अब इसे फिर से जोर-शोर से शुरू करने के दावे हो रहे हैं।
यह है डिक्वाय ऑपरेशन : मुखबिर योजना के तहत सफल डिक्वाय ऑपरेशन करने पर मुखबिर को 60 हजार रुपये, मिथ्या ग्राहक को एक लाख रुपये और मिथ्या ग्राहक सहायक को 40 हजार रुपये धनराशि पुरस्कार के तौर पर देने का प्रावधान किया गया है।
अब खिंचवा रहे फोटो
स्वास्थ्य विभाग भ्रूण लिंग परीक्षण क्या रोकेगा, उसे इसके प्रचार-प्रसार की भी सुध नहीं है। नौ माह हो गए। लेकिन स्वास्थ्य विभाग को यह तक नहीं पता कि इसके प्रचार प्रसार के लिए लगे होर्डिंग्स कहां-कहां हैं। और तो और होर्डिंग्स लगाने वालों के पैसे तक नहीं दिए गए हैं, जबकि वह कई बार इसकी मांग कर चुका है। अब स्वास्थ्य विभाग के अफसर जिले भर में जगह-जगह घूमकर होर्डिंग्स ढूंढ रहे हैं और उनके साथ फोटो खिंचवा रहे हैं। इसकी रिपोर्ट तैयार कर प्रशासन की दी जाएगी, ताकि भुगतान हो सके।
संसाधनों का अभाव
होर्डिंग्स के करीब 75 हजार रुपये बचे हुए हैं, उन्हीं के लिए होर्डिंग्स की रिपोर्ट तैयार की जा रही है। डिक्वाय ऑपरेशन के लिए संसाधनों का अभाव भी वजह है। हरियाणा के पास यहां से बेहतर इंतजाम हैं। यहां भी बेहतर इंतजाम किए जाएंगे। - डॉ. प्रवीण गौतम, अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी