यह हुआ बरामद
पांच तमंचे, 11 नाल, 30 हैमर ट्रिगर, 18 जोड़ी बॉडी की पत्ती, एक ड्रिल व दो ग्राइंडर मशीन समेत तमंचे बनाने के औजार बरामद कर लिए।
तालीम के नाम पर सिखाया तमंचे बनाना
एसएसपी के अनुसार फकरू का पूरा परिवार ही तमंचे बनाता है। आरोपी गुलहसन ने पूछताछ में बताया कि उसका पिता फकरू तमंचे बनाने में माहिर है। तालीम दिलाने के नाम पर पिता ने उसे तमंचे बनाना सिखाया था। उसकी मां भी तमंचे बनाती है। करीब एक साल पहले फकरू को पुलिस ने तमंचे बनाने में जेल भेजा था। जिसके बाद उसने मवाना में गोदाम किराए पर लेकर वहां तमंचे बनाने शुरू कर दिए थे। तमंचे बनाने में कोई दिक्कत आती थी तो वह जेल में फकरू से मिलने चला जाता था। अब वह काफी समय से खुद ही तमंचे बनवाकर सप्लाई कर रहा था। फकरू हाल में जेल से छूटा है। इस मुकदमे में फकरू और जीनत को भी नामजद कर उन पर 25-25 हजार का इनाम घोषित किया गया है।
दो से तीन हजार में बेचते तमंचा
आरोपी ने पूछताछ में बताया कि चुनावी मौसम में तमंचों और पिस्टल की डिमांड बढ़ जाती है। मांग के अनुसार वह दो से तीन हजार रुपये में एक तमंचा बनाता था। वहीं, पिस्टल भी ऑन डिमांड तैयार करा दी जाती थी। चुनाव में तमंचे और पिस्टल की डिमांड पूरी करने के लिए कई बार कारीगर भी बढ़ाए गए।
पहले भी तमंचा फैक्टरी का खुलासा
इससे पहले भी सरधना, परीक्षितगढ़, लिसाड़ीगेट और किठौर समेत कई थानों की पुलिस ने तमंचे बनाने की फैक्टरी पकड़ी हैं। लेकिन सवाल है कि पुलिस तमंचा फैक्टरी का खुलासा कर चुप बैठ जाती है, जबकि मुख्य सप्लायरों को पकड़ने में फेल हो जाती है। इसको लेकर पुलिस की कार्यशैली पर पहले भी कई बार सवाल उठे हैं।
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