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अंशुल की हत्या के विरोध में परीक्षितगढ़ बंद

Tue, 12 Jan 2016 02:02 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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कस्बे में यूं तो कई बार विभिन्न मुद्दों पर बंद का ऐलान हुआ। इसमें आपराधिक घटनाओं के विरोध के बीच राजनीतिक मुद्दे भी रहे। लेकिन युवा व्यापारी अंशुल अग्रवाल की हत्या पर कस्बे का ऐसा माहौल पहले कभी नहीं दिखा। इस ऐतिहासिक बंद में हर वर्ग और समुदाय अंशुल के परिजनों के गम में शामिल हुआ।
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मुख्य बाजार ही नहीं बल्कि कस्बे की चाय, मिठाई, सब्जी वाले, फल वालों तक ने अपनी दुकानें बंद रखीं। यही नहीं, सभी स्कूल, पेट्र्रोल पंप, बैंक और शराब की दुकानें पूरी तरह बंद रहने के अलावा मार्ग पर चलने वालीं बसों के भी चक्के थमे रहे। अंशुल की नृशंस हत्या पर हर आंख नम थी तो दिल में आक्रोश साफ नजर आ रहा था।

अंशुल की हत्या के विरोध में रोजाना की रोजी-रोटी कमाकर घर चलाने वाले सब्जी ठेले वालों ने आक्रोश जताया। कस्बा परीक्षितगढ़ के अलावा किठौर, शाहजहांपुर तथा हसनपुर कलां के व्यापारियों ने भी अपने प्रतिष्ठान बंद कर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर की। परीक्षितगढ़ के सुभाष चौक पर शोक सभा के बाद समाजसेवी पद्म सैन मित्तल, नगर पंचायत अध्यक्ष पति अमित मोहन टीपू, नरेंद्र खजूरी, विजेन्द्र लोहरे, चौधरी इंतजार अली, सनव्वर खान, सुनील अग्रवाल, गुल्लू प्रधान आदि सैकड़ों लोगों ने अंशुल की हत्या का खुलासा न होने तक व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रखने की अपील की। जिसका लोगों ने समर्थन किया। वहीं, अगवानपुर, मवाना, राधना सहित दर्जनों गांवों के सभी वर्ग के व्यापारियों ने लूट और हत्या का खुलासा न होने तक परिक्षितगढ़ के व्यापारियों का समर्थन देने की घोषणा की है।
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वहीं, किठौर में बाजार बंदी के बीच व्यापारी किठौर थाने के सामने निरीक्षण भवन में पुलिस को ज्ञापन देने के लिए एकत्र हुए। तभी डीआईजी रेंज आशुतोष कुमार सोमवार सुबह करीब 11.30 बजे थाने पहुंचे। बातचीत के लिए कुछ व्यापारियों को एक दरोगा से थाने बुलवाया। लेकिन डीआईजी अचानक ही व्यापारियों से मिले बिना थाने से निकल गए। जिससे व्यापारियों में आक्रोश फैल गया। सैकड़ों व्यापारी मेरठ-गढ़ मार्ग पर धरना देकर बैठ गए और जाम लगा दिया। करीब आधा घंटा बाद इंस्पेक्टर किठौर से वारदात का दो दिन में खुलासा करने का आश्वासन मिलने पर वे शांत हुए।
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