13 साल के मासूम अतिशय ने जब अपहरण के उन नौ दिनों की आपबीती सुनाई तो सभी के रोंगटे खड़े हो गए। जुबान कई बार लड़खड़ाई तो चेहरे पर खौफ ही नजर आया। कहने को रिश्तेदार, लेकिन आरोपी खाने के नाम पर अतिशय को एक बिस्किट और एक मठरी तो प्यास लगने पर आधी कटोरी पानी देकर उसे चुप करा देते थे।
अतिशय नौ दिन के उन भयावह पलों को याद कर सिहर उठता है। अतिशय ने बताया कि 19 फरवरी की सुबह करीब 8:30 बजे बजे वह अपने घर की गली के बाहर स्कूल बस के इंतजार में खड़ा था। तभी प्रतीक अंकल एक कार में वहां आए। उन्होंने कार से उतरकर उससे हैलो की और कार की ड्राइविंग सीट पर बैठे एक अंकल को हाथ मिलाने को कहा। वह जैसे ही उन अंकल से हाथ मिलाने कार के पास गया तो प्रतीक अंकल ने उसे कार के अंदर धक्का दे दिया और खुद भी अंदर बैठ गए। कार चला रहे अंकल ने कार दिल्ली की ओर दौड़ा दी।
उसने प्रतीक से कहा कि उसे स्कूल जाना है। स्कूल बस के ड्राइवर अंकल उसका इंतजार कर रहे होंगे। उसकी पापा से मोबाइल पर बात करा दो, इस पर प्रतीक अंकल ने उसके पापा का नाम लेकर झूठमूठ मोबाइल पर बात की और उसे बताया कि उसकी बात हो गई है। कुछ देर बाद प्रतीक अंकल ने उसके मुंह पर टेप लगा दी और हाथ बांधकर कार की सीट के नीचे की ओर डाल दिया। उन्होंने उसे कुछ सुंघाया जिससे वह बहोश हो गया।
जब उसे होश आया तो वह एक कमरे में था। दो अंकल थोड़ी थोड़ी देर में कमरे में आकर उसे देखते और चले जाते। प्रतीक अंकल भी वहां आते थे। उसके स्कूल बैग में उसकी स्पोर्ट्स डे वाली ड्रेस भी थी। बदमाश उसी ड्रेस को पहनाकर उसे कमरे रखते थे। कमरे में भी उसके हाथ पैर बांधकर रखे जाते थे।
अंकल मेरे एग्जाम हैं, प्लीज मुझे घर छोड़ दो
प्रतीक चाचू प्लीज मेरी पापा से बात करा दो। मुझे घर क्यों नहीं जाने दे रहे। मम्मी, पापा, अम्मा, बाबा सबकी याद आ रही है। मेरे एग्जाम हैं, अंकल प्लीज आप मुझे घर छोड़ आओ। अतिशय बार बार यह कहता रहा, लेकिन आरोपियों का कलेजा नहीं पसीजा। अतिशय ने बताया कि जब वह कमरे में बंद था तो प्रतीक अंकल वहां आते रहते थे। वह पूछता था प्रतीक चाचू आपने मुझे यहां क्यों बांधकर रखा है।
आप क्या चाहते हो? पापा से मेरी बात क्यों नहीं कराते। अतिशय की ये बातें सुन परिजनों की आंखें भर आई। वहीं परिवार के अलावा वहां आए रिश्तेदार प्रतीक को कोसने लगे। परिजनों का कहना था कि उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि कोई अपना ही दगा देगा। प्रतीक को यहां ज्यादा आना जाना नहीं था।