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हड़ताल पर जूनियर डॉक्टर, एमबीबीएस छात्रों ने दी तहरीर

Sun, 14 Feb 2016 01:18 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मेरठ
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जूनियर डॉक्टरों ने मारपीट के विरोध में शनिवार को दिन भर कामकाज ठप रखा। वहीं एमबीबीएस के छात्रों ने मेडिकल थाने में कुछ जूनियर डॉक्टरों के खिलाफ तहरीर दी। सभी छात्र हॉस्टल से लेकर मेडिकल थाने और फिर प्राचार्य कार्यालय पहुंचे। छात्रों ने कहा, हमारी मंशा किसी भी सूरत में कॉलेज का माहौल बिगाड़ने की नहीं है। अगर कार्रवाई की बात हो रही है तो फिर उन जूनियर डॉक्टरों पर भी कार्रवाई हो, जिन्होंने संजीत को गंभीर रूप से बीमार होने के बाद भी भर्ती नहीं किया और मौत के बाद उसे शराबी बताया।
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प्राचार्य कार्यालय में करीब तीन घंटे तक विस्तार से बातचीत हुई। छात्र आरोपी जूनियर, सीनियर रेजीडेंट डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और कॉलेज स्तर से अनुशासनात्मक कार्रवाई कराने की मांग पर अड़े रहे। इस बीच छात्रों ने आरोप लगाया है कि रात में इमरजेंसी जेआर (जूनियर रेजीडेंट) वन द्वारा ही चलती है, जबकि सीनियर गायब रहते हैं। छात्र दिवाकर का कहना था कि हम लोग यहां पर गुंडई करने या फिर मरीजों को नुकसान पहुंचाने के लिए नहीं आए हैं, लेकिन अगर कार्रवाई नहीं होती है तो मजबूरन आंदोलन करना पड़ेगा।

अगर कालेज प्रशासन मौका देता है तो इंटर्न करने वाले छात्र जेआर से कहीं ज्यादा अच्छी चिकित्सा सुविधा मरीजों को देंगे। इसी बीच कॉलेज प्राचार्य डॉ. केके गुप्ता ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए कार्रवाई की जा रही है। प्राचार्य ने रविवार शाम छह बजे तक छात्रों से विस्तृत मांग देने को कहा है, ताकि उनकी मांगों पर विचार कर आगे की कार्रवाई की जा सके।
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संजीत की कहानी सुन निकल पड़े आंसू
करीब साढ़े तीन सौ छात्रों की मौजूदगी में संजीत के साथी दिवाकर ने पूरी कहानी बया की तो हर किसी की आंख से आंसू निकल आए। दिवाकर ने कहा बृहस्पतिवार रात 2 बजे संजीत ने मुझे फोन कर पेट दर्द की बात कही। इसके बाद वह मोटरसाइकल लेकर उसके हास्टल में पहुंचा तो वो कमरे में दर्द से चिल्ला रहा था। इस पर वह उसे बाइक पर बैठाकर इमरजेंसी लेकर पहुंचा, जहां पर कोई सीनियर रेजीडेंट नहीं था।

बस एक जेआर वन था जिसको बीमारी के बारे में बताया तो उसने झट से दो पेन किलर इंजेक्शन लगा दिए। साथ ही पेट और हार्ट का एक्स-रे कराने के लिए कहा। दो पेन किलर लगने के बाद भी उसे दर्द महसूस हो रहा था, जब उसका एक्सरे कराया तो वहां पर टेक्नीशियन ने देने से मना कर दिया। कहां जेआर आकर खुद ले जाए। हाथ जोड़े तब भी नहीं दिया फिर जेआर को दो दफा फोन किया कि बोस ये बिना आपके रिपोर्ट नहीं दे रहा है, जिस पर जेआर का जवाब था कि अब मैं रात में एक्सरे लेने थोड़े ही आऊंगा, मेरी टेक्नीशियन से फोन पर बात कराओ। उन्होंने टेक्नीशियन से पूछा कि तू खुद ही बता दे कि तुझे एक्सरे में क्या लग रहा है तो उसने कहा कि एक्सरे में तो हार्ट फैला हुआ लग रहा है।

दिवाकर ने बताया कि जेआर की बात कराने के बाद इमरजेंसी लौटा तो उस वक्त भी संजीत को दर्द था, मैने कहा बोस इसे भर्ती कर लो, लेकिन उन्होंने झट से एक और पेनकिलर का इंजेक्शन लगवा दिया और कहा इसे हॉस्टल ले जाओ। उसके बाद उसे हॉस्टल छोड़ दिया, जहां वह सो गया, क्योंकि पेन किलर का नशा था। शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े तीन बजे एक साथी का फोन आया कि यार संजीत की तबीयत ज्यादा खराब है, जल्दी से गाड़ी लेकर आ जा। इसके बाद मैं गाड़ी लेकर हॉस्टल पहुंचा तो वो दर्द से चिल्ला रहा था और हाथ जोड़कर कह रहा था, भाई मुझे बचा लो। इस दौरान संजीत का भाई और मैं उसे लेकर डॉ. तुंगवीर आर्य के यहां पहुंचे, उन्हें फीस भी दी और यह भी बताया कि सर हम इंटर्न हैं लेकिन उन्होंने कहा कि अभी मरीज को देख रहा हूं।

करीब 25 मिनट तक नंबर नहीं आया तो हम लोग संजीत को डॉ. प्रशांत सोलंकी के यहां लेकर पहुंचे। वहां पर भी काउंटर पर कह दिया कि अभी थोड़ी देर इंतजार करो। इस बीच संजीत कुर्सी से गिर पड़ा, जिसके बाद हम लोगों ने उसे कंधों पर उठाकर सामने लोकप्रिय की इमरजेंसी में भर्ती कराया। वहां डॉक्टर ने देखते ही कह दिया, इसकी मौत हो चुकी है। लेकिन फिर भी उम्मीद थी इसके बाद हम लोग इमरजेंसी लेकर पहुंचे। जहां एक जेआर ने यह कह दिया कि उसे तो एक दिन मरना ही था।

बृहस्पतिवार को ही फट चुकी थी आंत
दिवाकर ने कहा कि उसकी एक्सरे रिपोर्ट अगर ढंग से देखी जाती तो आज संजीत हमारे बीच होता। क्योंकि अब उसकी एक्सरे रिपोर्ट सीनियर डॉक्टरों को दिखाई है तो उन्होंने कहा है कि पेट के एक्सरे में साफ हो गया था कि परफोरेशन काफी बढ़ा हुआ है, जिससे साफ था कि आंत बृहस्पतिवार रात को ही फट गई थी।

घटना के बाद मरीज भी सहमे
मेडिकल कॉलेज में औसतन 2500 के आसपास प्र्रतिदिन की ओपीडी रहती है, लेकिन शनिवार को दोपहर एक बजे तक करीब 1700 मरीज ही देखे गए। माना जा रहा है कि मारपीट की घटना के बाद आम लोग मेडिकल कॉलेज में इलाज कराने से कतरा रहे हैं।
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