एनकाउंटर में खाकी का शर्मनाक चेहरा भी देखा गया। पुलिस का अमला हथियारों से लैस खड़ा था। तभी बहादुर दीपक (ग्रामीण) को बुलेटप्रूफ जैकेट पहनाकर पुलिस ने ईख के खेत में अकेला ट्रैक्टर पर बैठाकर बदमाशों को तलाशने के लिए उतार दिया। कोई अनहोनी हो जाती तो कौन पुलिस अधिकारी जिम्मेदार होता, इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
चार बदमाश ईख के खेत में थे। पुलिस बदमाशों को बाहर लाने के प्रयासों में जुटी थी। पुलिस ने प्लानिंग बनाई कि ट्रैक्टर पर बैठकर बदमाशों को तलाश किया जा सकता है। इस दौरान चौकीदार का बेटा दीपक ट्रैक्टर लेकर वहां पहुंचा। दीपक को बुलेटप्रूफ जैकेट पहनाकर तीन पुलिसकर्मी संग ट्रैक्टर अंदर ईख में भेजा। थोड़ी दूर चलते ही पुलिसकर्मी ट्रैक्टर से उतर गए और अकेला दीपक ही बदमाशों की तलाश में ईख के खेत में घुस गया।
उसकी बहादुरी के चलते ही बदमाश ईख से खेत से बाहर आए। जहां पर पुलिस और ग्रामीणों ने घेराबंदी कर ली। दो बदमाश को गोली लगी तो तीसरे बदमाश ने खुद आत्मसमर्पण कर दिया। जबकि चौथा बदमाश कब भाग गया, इसकी किसी को भनक तक नहीं लगी। ग्रामीणों में चर्चा रही कि गाजियाबाद पुलिस ने बहादुरी का काम तो किया, लेकिन अकेले दीपक को बुलेटप्रूफ जैकेट पहनाकर खेत में उतारने की इजाजत किसने दी। अगर अनहोनी हो जाती तो पुलिस के पास कोई जवाब नहीं बनता।